संगोष्ठी में देशभर से योग गुरु, विद्वान, योग चिकित्सक, संस्थागत प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और योग साधक शामिल होंगे। आयोजन के दौरान भारत में योग शिक्षा, अनुसंधान और अभ्यास के विकास, मानकीकरण तथा इसके भविष्य की दिशा पर चर्चा की जाएगी।
आयोजकों के अनुसार, संगोष्ठी की चर्चाओं को चार प्रमुख क्षेत्रों—वैज्ञानिक अनुसंधान, दार्शनिक आधार, आध्यात्मिक साधना तथा नीति, मानक एवं प्रमाणन—के इर्द-गिर्द रखा गया है। कार्यक्रम में पैनल चर्चा, अनुभवात्मक सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। इसमें IYA के लाइफ मेंबर्स, योग प्रोफेशनल मेंबर्स, योग वॉलंटियर मेंबर्स, सदस्य संस्थानों, एसोसिएट सेंटरों और विभिन्न राज्य अध्यायों के प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी।
संगोष्ठी की अध्यक्षता IYA की अध्यक्ष माँ डॉ. हंसाजी योगेंद्र और महासचिव श्री सुबोध तिवारी करेंगे। कार्यक्रम में पद्म श्री स्वामी भारत भूषण, पद्म श्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, योगाचार्य धाकराम सपकोटा तथा योग प्रमाणन बोर्ड के प्रमुख प्रो. शेखावत सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों को योग केंद्र स्थापित करने, व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने और साधकों के लिए वैध प्रमाणन की प्रक्रिया से संबंधित व्यावहारिक मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। बाहर से आने वाले प्रतिनिधियों के लिए परिसर में ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने की बात भी प्रेस नोट में कही गई है।
IYA के अनुसार, संगोष्ठी में सदस्य, विद्यार्थी, गैर-सदस्य और ऑनलाइन प्रतिभागी पंजीकरण करा सकते हैं। कार्यक्रम, शुल्क और पंजीकरण से संबंधित विस्तृत जानकारी IYA की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।
योग शिक्षा और प्रमाणन पर विशेष जोर
इंडियन योग एसोसिएशन की स्थापना 2008 में पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. बी.के.एस. अयंगर के मार्गदर्शन में हुई थी। संस्था के अनुसार, यह एक पंजीकृत संस्था और स्व-नियामक निकाय है, जो देश के प्रमुख योग संस्थानों को एक मंच पर लाने के साथ योग शिक्षा एवं प्रमाणन के मानकीकरण, वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा योग के अभ्यास और दर्शन के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करती है।
संगोष्ठी से काउंसिल फॉर सर्टिफिकेशन एंड रेगुलेशन ऑफ योगा एंड नेचुरोपैथी (CCRYN) के नॉलेज पार्टनर के रूप में जुड़े होने की जानकारी भी दी गई है।