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Wednesday, May 13, 2026

News Desk / News Delhi /May 10, 2026

“माँ.. तेरे लिए वो शब्द कहाँ से लाऊँ” — कविता में छलका एक बेटी का दर्द, सम्मान और संवेदनाएँ !
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की युवा लेखिका मेघना वीरवाल की मार्मिक कविता “माँ..” इन दिनों साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। इस कविता में एक बेटी ने माँ के त्याग, प्रेम, संघर्ष और मौन बलिदान को बेहद भावनात्मक शब्दों में व्यक्त किया है। कविता न केवल मातृत्व की महानता को दर्शाती है, बल्कि समाज में महिलाओं के योगदान और उनकी अनदेखी पीड़ा को भी उजागर करती है।

कला-साहित्य / माँ की ममता और त्याग को समर्पित भावुक कविता ने छुआ दिल, लेखिका मेघना वीरवाल की रचना हो रही सराही

लेखिका ने सरल लेकिन गहरे शब्दों के माध्यम से माँ की उन भावनाओं को सामने रखा है, जिन्हें अक्सर परिवार और समाज सामान्य मानकर अनदेखा कर देता है। कविता की प्रत्येक पंक्ति पाठकों को भावुक कर देने की क्षमता रखती है।

कविता : “माँ..”


कोरा है पन्ना मेरा
माँ...
तेरे वो जज्बात
कहाँ से लाऊँ

जब उठ खड़ी होती थी
मेरी एक आहट से
माँ..
तेरी वो नींद
कहाँ से लाऊँ

मेरी एक रोटी के बदले
ये कह देना कि भूख नहीं है
माँ..
तेरी वो भूख
कहाँ से लाऊँ

फीकी लगती है सारी कायनात
तेरे ना होने पर
अँधेरा भी खलने लगता है
माँ..
तेरी वो रोशनी
कहाँ से लाऊँ**

तुम पहले एक स्त्री हो
पर सबके मन को भली हो
माँ...
तेरी वो इज्जत
कहाँ से लाऊँ

खोयी रहती हो सबके मनोहार में
उगते सूरज से ढलती शाम तक
माँ..
तेरी वो छुट्टी
कहाँ से लाऊँ

शिकायत ना कभी कोई
ना बैर पाला मन में
माँ..
तेरी वो शिकायतों का राग
कहाँ से लाऊँ

बयाँ कर पाए
तेरी हर छोटी से बड़ी कुर्बानी को
माँ..
तेरे लिए वो शब्द कहाँ से लाऊँ

हँसते हँसते सब सह लिया तूने
तानों का विष
घूँट में पी लिया तूने
तेरी बेटी हूँ मैं
माँ..
क्या मैं भी मौन रह जाऊँ


मातृत्व के संघर्ष और सम्मान को दर्शाती है कविता :


कविता में माँ की ममता, त्याग और निस्वार्थ प्रेम को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। लेखिका ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि माँ केवल परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह पूरे परिवार की भावनात्मक शक्ति होती है।

विशेष रूप से अंतिम पंक्तियाँ समाज में महिलाओं द्वारा सहन किए जाने वाले मानसिक और सामाजिक दबावों पर भी सवाल खड़े करती हैं। यही कारण है कि यह कविता पाठकों के दिलों को गहराई से छू रही है।

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