लोकसभा में बिल पर बहस के दौरान अमित शाह ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “हमारे देश में कौन आता है, कब आता है और कितने समय के लिए आता है, यह जानना देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है। भारत कोई धर्मशाला नहीं है। जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनेगा, उसे रोकने का अधिकार संसद के पास है।” उन्होंने यह भी जोर दिया कि यह विधेयक कठोरता और करुणा का मिश्रण है, जिसका उद्देश्य घुसपैठ को रोकना और शरणार्थियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखना है।
शाह ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पकड़े गए घुसपैठियों के पास बंगाल का आधार कार्ड मिलता है। यह साफ है कि वहां की सरकार घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है।” गृह मंत्री ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वे अशांति फैलाने के इरादे से आते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही, उन्होंने पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न झेलने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस बिल के तहत भारत में प्रवेश के लिए वैध पासपोर्ट और वीजा अनिवार्य होगा। बिना कागजात के प्रवेश करने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। शाह ने कहा, “हमारी नीति साफ है- जो देश के विकास में योगदान देगा, उसका स्वागत है, लेकिन जो खतरा बनेगा, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने शरणार्थी संबंधी अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, क्योंकि पिछले 5,000 सालों से उसका प्रवासी नीति का रिकॉर्ड बेदाग रहा है।
विपक्ष ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे संविधान के खिलाफ बताया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कमजोर कर सकता है। वहीं, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने इसे “अमानवीय” करार दिया। जवाब में शाह ने कहा, “यह बिल गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसका विरोध सिर्फ राजनीति के लिए हो रहा है।” उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या वे घुसपैठ को बढ़ावा देना चाहते हैं।
बीजेपी नेताओं ने इस बिल को ऐतिहासिक कदम बताया। बीजेपी सांसद सुनील शर्मा ने कहा, “यह विधेयक देश की सीमाओं को सुरक्षित करेगा और अवैध घुसपैठ पर लगाम लगाएगा।” सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर खूब चर्चा हुई। एक यूजर ने लिखा, “अमित शाह का यह बयान सही है। भारत को धर्मशाला बनने से रोकना जरूरी है।” वहीं, कुछ ने इसे सख्त लेकिन जरूरी कदम माना।
इस चर्चा के बाद लोकसभा में इमीग्रेशन बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह बिल अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भारत की आव्रजन नीति को नया रूप देगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।