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Wednesday, February 4, 2026

24JT NEWSDESK / Udaipur /October 15, 2025

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) – अंतर्राष्ट्रीय हर्बल औषधि नियामक सहयोग (IRCH) की 16वीं वार्षिक बैठक में भारत ने एक बार फिर हर्बल औषधियों के वैश्विक नियमन में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका का प्रदर्शन किया।

"भारत ने विश्व मंच पर हर्बल औषधि विनियमन में दिखाई दमदार मौजूदगी" | Photo Source : PIB
अन्तर्राष्ट्रीय / भारत ने विश्व मंच पर हर्बल औषधि विनियमन में दिखाई दमदार मौजूदगी

यह महत्वपूर्ण बैठक 14 से 16 अक्टूबर तक चल रही है, जिसमें दुनियाभर से स्वास्थ्य विशेषज्ञ, नीति निर्माता और नियामक संस्थाएं एकत्र हुईं हैं। मकसद है — हर्बल औषधियों के वैश्विक मानकों को मजबूत करना और उनके सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करना।

भारत की प्रभावशाली भागीदारी


भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के प्रतिनिधिमंडल ने इस बैठक में जबरदस्त सक्रियता दिखाई। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे डॉ. रघु अरक्कल (सलाहकार - आयुर्वेद, उप महानिदेशक, आयुष मंत्रालय) ने तकनीकी सत्रों में भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने "हर्बल औषधियों की प्रभावकारिता और उपयोग" पर कार्य समूह-3 की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें भारत के प्रमाण-आधारित विनियामक ढांचे की विस्तार से चर्चा की गई।

वहीं, भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी फार्माकोपिया आयोग (PCIM&H) के निदेशक डॉ. रमन मोहन सिंह ने "हर्बल औषधियों की सुरक्षा और विनियमन (कार्य समूह-1)" की रिपोर्ट पेश की। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय परिप्रेक्ष्य से सुरक्षा व मानकों पर एक अलग प्रस्तुति भी दी।

गाजियाबाद की कार्यशालाओं का जिक्र


उल्लेखनीय है कि इन दोनों कार्यशालाओं का आयोजन 6 से 8 अगस्त 2025 के बीच गाजियाबाद में हुआ था। इन्हें WHO के सहयोग से भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और PCIM&H ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था, जो कि जकार्ता बैठक के लिए प्रारंभिक तकनीकी आधार बने।

गुणवत्ता, मानकीकरण और सततता पर भारत का फोकस


राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) के CEO डॉ. महेश दाधीच ने डॉ. सिंह के साथ मिलकर "गुणवत्ता नियंत्रण, मानकीकरण और सततता" पर संयुक्त सत्र में प्रस्तुति दी। डॉ. दाधीच ने औषधीय पौधों के सतत उपयोग और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में वैश्विक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।

वैश्विक मंच पर भारत की निर्णायक भूमिका


भारत की यह भागीदारी न केवल उसकी विज्ञान-सम्मत पारंपरिक चिकित्सा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि भारत अब हर्बल औषधियों के अंतरराष्ट्रीय मानकों के निर्धारण में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।

WHO-IRCH के माध्यम से भारत, प्राकृतिक उत्पाद-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सामंजस्यपूर्ण और वैज्ञानिक नियमन को आगे बढ़ाने में जुटा है।

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