यह भूकंप म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में मांडले शहर के पास आया, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। भूकंप का केंद्र जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे था, जिसके कारण इसकी तीव्रता सतह पर और भी खतरनाक हो गई। भूकंप के बाद कई झटके भी महसूस किए गए, जिससे तबाही का दायरा और बढ़ गया। मांडले, नाय प्यी तॉ, सागाइंग और अन्य इलाकों में इमारतें ढह गईं, सड़कें टूट गईं और कई पुल क्षतिग्रस्त हो गए। म्यांमार में अब तक 1,700 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3,400 से ज्यादा लोग घायल हैं। इसके अलावा सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
थाईलैंड तक पहुंची तबाही:
भूकंप का असर म्यांमार से करीब 1,000 किलोमीटर दूर थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक तक देखा गया। बैंकॉक में एक निर्माणाधीन गगनचुंबी इमारत ढह गई, जिसमें कई मजदूर मलबे में दब गए। अब तक वहां 9 लोगों की मौत की खबर है, जबकि दर्जनों लोग अभी भी लापता हैं। थाईलैंड में ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई, क्योंकि भूकंप के झटके वहां भी साफ तौर पर महसूस किए गए। राहत और बचाव टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश में जुटी हैं।
म्यांमार में राहत कार्यों में चुनौतियां:
म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध और खराब बुनियादी ढांचे ने इस आपदा को और जटिल बना दिया है। भूकंप प्रभावित इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं ठप हो गई हैं। कई जगहों पर लोग अपने हाथों से मलबा हटा रहे हैं, क्योंकि भारी मशीनरी और संसाधनों की कमी है। म्यांमार की सैन्य सरकार ने इस आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है, जो उसके लिए एक असामान्य कदम है। कई देशों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है, जिसमें राहत सामग्री, चिकित्सा टीमें और खोज व बचाव दस्ते शामिल हैं।
हालांकि, गृहयुद्ध के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। सैन्य सरकार और विद्रोही समूहों के बीच चल रहे संघर्ष ने राहत कार्यों को प्रभावित किया है। विद्रोही समूहों ने दो हफ्ते के लिए आंशिक संघर्ष विराम की घोषणा की है, लेकिन सैन्य सरकार ने कुछ इलाकों में हवाई हमले जारी रखे हैं, जिसकी कड़ी आलोचना हो रही है।
भूकंप की वजह और खतरा:
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह भूकंप सागाइंग फॉल्ट पर हुआ, जो एक प्रमुख भूगर्भीय संरचना है। यह फॉल्ट भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव के कारण सक्रिय है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों तक झटके जारी रह सकते हैं, जिससे स्थिति और खराब हो सकती है। इस भूकंप को पिछले 100 सालों में म्यांमार में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मदद और हालात:
म्यांमार में अस्पताल घायलों से भरे हुए हैं और कई जगह मेडिकल सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। लोग खुले मैदानों और सड़कों पर रात गुजार रहे हैं, क्योंकि उनके घर या तो ढह गए हैं या फिर दोबारा झटकों के डर से वे घरों में लौटने को तैयार नहीं हैं। पड़ोसी देशों से राहत सामग्री और बचाव टीमें म्यांमार पहुंच रही हैं, लेकिन खराब सड़कों और संचार व्यवस्था के अभाव ने इन प्रयासों को मुश्किल बना दिया है।
थाईलैंड में भी सरकार ने आपातकाल की घोषणा की है और प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज कर दिए हैं। बैंकॉक में ढही इमारत के मलबे से लोगों को निकालने के लिए ड्रोन और प्रशिक्षित कुत्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आगे की चुनौती:
म्यांमार में पहले से ही गृहयुद्ध और आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों के लिए यह भूकंप एक और बड़ा झटका है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस आपदा से हुए नुकसान की भरपाई में म्यांमार को सालों लग सकते हैं। अगर मरने वालों की संख्या 10 हजार तक पहुंचती है, तो यह म्यांमार के आधुनिक इतिहास की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक होगी।
फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर म्यांमार पर टिकी है। राहत कार्यों में तेजी लाने और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने की कोशिश जारी है। यह भूकंप न केवल म्यांमार, बल्कि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।