लावरोव ने मॉस्को में आयोजित एक सम्मेलन "रूस और भारत: एक नई द्विपक्षीय एजेंडा की ओर" में वीडियो संबोधन के जरिए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय सरकार के प्रमुख से मिले निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। रूसी राष्ट्राध्यक्ष की भारत यात्रा की तैयारियां चल रही हैं।" हालांकि, इस दौरे की तारीखों का अभी खुलासा नहीं किया गया है। यह यात्रा पुतिन की यूक्रेन संकट शुरू होने के बाद पहली भारत यात्रा होगी। उनकी आखिरी भारत यात्रा दिसंबर 2021 में हुई थी, जब 21वां भारत-रूस शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था।
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल जुलाई 2024 में रूस का दौरा किया था, जो उनकी तीसरी बार सत्ता में आने के बाद पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने पुतिन को भारत आने का निमंत्रण दिया था। इसके बाद अक्टूबर 2024 में मोदी ने कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया, जहां दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। लावरोव ने कहा कि भारत और रूस के बीच "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" विकसित हो रही है, जो दोनों देशों के हितों को मजबूत करती है।
भारत और रूस के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। यूक्रेन संकट के बाद रूस से सस्ते तेल की खरीद में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है और दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 60 अरब डॉलर को पार कर गया है। इस दौरे में रक्षा सहयोग, व्यापार और यूक्रेन संकट जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी हाल ही में कहा था कि भारत, रूस के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
रूस के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को पुतिन के "2030 के लिए नए आर्थिक रोडमैप" को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा है। दूसरी ओर, भारत ने यूक्रेन संकट में संतुलित रुख अपनाया है और शांति के लिए बातचीत का समर्थन किया है। पिछले साल सितंबर 2022 में मोदी ने पुतिन से कहा था, "यह युद्ध का युग नहीं है," जिसे वैश्विक मंच पर सराहा गया था।
बीजेपी नेताओं ने इस दौरे को भारत की कूटनीतिक सफलता करार दिया है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "मोदी जी की विदेश नीति ने भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति दी है। पुतिन का दौरा इस बात का सबूत है।" वहीं, विपक्षी दलों ने इसे सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया बताया है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा, "भारत और रूस के संबंध पुराने हैं। यह दौरा स्वाभाविक है, लेकिन हमें यूक्रेन संकट में अपनी भूमिका पर भी ध्यान देना चाहिए।"
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन संकट में शांति की पहल शुरू की है। ट्रंप ने हाल ही में पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से बात की थी। विश्लेषकों का मानना है कि भारत इस संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है, जैसा कि अमेरिका ने भी सुझाया है।