बराक हॉस्टल कमेटी के नेतृत्व में हुए इस उग्र प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलन का अंत शिक्षा मंत्रालय का पुतला फूंकने के साथ हुआ। छात्रों ने देश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामलों का हवाला देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
'नया हॉस्टल, लेकिन दीवारें गिर रही हैं' — नवनिर्वाचित अध्यक्ष का भ्रष्टाचार पर बड़ा आरोप
बराक हॉस्टल के पहले आधिकारिक चुनाव (11 अप्रैल, 2026) में अध्यक्ष चुने गए ऋषिकेश (सत्र 2026-27) ने कहा:
"हॉस्टल को शुरू हुए एक साल से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन छात्र बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। नए बने इस भवन के निर्माण में साफ तौर पर भ्रष्टाचार नजर आ रहा है। दीवारें इतनी कमजोर हैं कि पपड़ी बनकर गिर रही हैं। पानी के रिसाव (Leakage) के कारण काई (Green Moss) जम चुकी है। यहां तक कि दीवारों पर टांगे जाने वाले अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) भी कमजोर प्लास्टर के कारण गिर रहे हैं। हमारी मांग है कि सीपीडब्ल्यूडी (CPWD) तुरंत हस्तक्षेप करे और इसमें शामिल निजी कंपनियों पर कार्रवाई करे।"
बराक हॉस्टल के छात्रों की मुख्य मांगें और शिकायतें :
छात्रों ने अपनी प्रेस रिलीज में जेएनयू प्रशासन और संबंधित मंत्रालयों के सामने निम्नलिखित गंभीर मुद्दे उठाए हैं:
- मेस सुविधा का न होना: हॉस्टल की सबसे बुनियादी जरूरत 'मेस' अब तक शुरू नहीं हो सकी है। 10 मार्च, 2026 को डोनर (DoNER) मंत्रालय के अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया था। प्रशासन का कहना है कि मेस कर्मचारियों, बर्तनों और फ्रिज-टोस्टर जैसे जरूरी उपकरणों के लिए फंड की भारी कमी है।
- एक प्लग पॉइंट के लिए 6 महीने का वक्त: विश्वविद्यालय के बिजली विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए छात्रों ने बताया कि प्रशासन ने एक साधारण इलेक्ट्रिकल प्लग और सॉकेट लगाने के लिए 6 महीने का समय मांगा है, जो बेहद हास्यास्पद है।
- इनडोर स्पोर्ट्स और वाई-फाई की कमी: एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी छात्रों के मनोरंजन के लिए एक भी इनडोर खेल सुविधा नहीं है। हालांकि, वाई-फाई की फाइलें प्रक्रिया में हैं, जिसके लिए छात्रों ने डोनर मंत्रालय और जेएनयू प्रशासन का आभार भी जताया।
- वीसी (VC) और मंत्रालयों का ध्यान: छात्र प्रतिनिधियों ने डीन ऑफ स्टूडेंट्स (DoS) से मुलाकात की और कुलपति (Vice-Chancellor) कार्यालय में बैठक का समय मांगा, लेकिन वीसी ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय और खेल मंत्रालय ने भी छात्रों को मुलाकात का समय (Appointment) देने से इनकार कर दिया।
"देश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा है यह लापरवाही"
छात्र कमेटी ने बराक हॉस्टल की इस स्थानीय समस्या को देश की व्यापक शिक्षा व्यवस्था में चल रहे संकट से जोड़ा। प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में देश के भीतर हुए विभिन्न पेपर लीक और परीक्षाओं की विफलता का मुद्दा उठाते हुए एनटीए (NTA) को भंग करने की मांग की।
छात्रों ने देशव्यापी संकटों का किया जिक्र:
"यह वही मंत्रालय हैं जो नीट (NEET), एसएससी जीडी (SSC GD), सिविल कोर्ट चपरासी भर्ती, सीयूईटी यूजी (CUET UG) में तकनीकी गड़बड़ी, सीबीएसई-ओएसएम (CBSE-OSM) सिस्टम की विफलता, उत्तर प्रदेश लेखपाल और बिहार दरोगा परीक्षा जैसी निरंतर पेपर लीक की घटनाओं पर आंखें मूंदे बैठे हैं। इन वजहों से छात्र आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं, जिसकी जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।"
छात्रों ने हालिया
CUET PG 2026 परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि आधिकारिक नोटिफिकेशन में परीक्षा की तारीख 27 मार्च तक ही थी, लेकिन परीक्षाएं 28, 29 और 30 मार्च को भी आयोजित की गईं, जो प्रशासनिक मिसमैनेजमेंट का बड़ा सबूत है।
जब तक जवाबदेही नहीं, तब तक शांत नहीं होंगे छात्र
बराक हॉस्टल कमेटी : यह शांतिपूर्ण आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि प्रशासन और मंत्रालय उनकी मांगों को पूरा नहीं करते। छात्रों की मुख्य मांग है कि कुलपति तुरंत अपनी चुप्पी तोड़ें और छात्रों की फंड मुहैया कराने वाले मंत्रालयों (शिक्षा और डोनर मंत्रालय) के साथ एक संयुक्त बैठक आयोजित करवाएं।