शाह का ममता पर हमला:
लोकसभा में बिल पर बहस के दौरान अमित शाह ने कहा, "भारत कोई धर्मशाला नहीं है। जो लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं, उन्हें देश में घुसने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अगर कोई देश के विकास में योगदान देने आता है, तो उसका स्वागत है।" उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। शाह ने कहा, "450 किलोमीटर की फेंसिंग का काम इसलिए रुका हुआ है, क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार जमीन नहीं दे रही। जब भी फेंसिंग का काम शुरू होता है, सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता गुंडागर्दी और धार्मिक नारेबाजी करते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "पहले बांग्लादेशी और रोहिंग्या असम के रास्ते भारत में घुसते थे, जब वहां कांग्रेस की सरकार थी। अब वे पश्चिम बंगाल से आते हैं, जहां TMC सत्ता में है। इन घुसपैठियों को आधार कार्ड और वोटर कार्ड कौन देता है? पकड़े गए ज्यादातर बांग्लादेशियों के पास 24 परगना जिले के आधार कार्ड मिले हैं।" शाह ने दावा किया कि 2026 में पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनते ही घुसपैठ पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
बिल का मकसद और प्रावधान:
'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल, 2025' का उद्देश्य भारत में विदेशियों के प्रवेश, ठहरने और निकासी को नियंत्रित करना है। यह बिल चार पुराने कानूनों- पासपोर्ट (एंट्री इनटू इंडिया) एक्ट 1920, रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स एक्ट 1939, फॉरेनर्स एक्ट 1946 और इमिग्रेशन (कैरियर्स लायबिलिटी) एक्ट 2000 को रद्द कर एक नया ढांचा लाता है। शाह ने कहा कि यह बिल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा और विदेशियों की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करेगा।
बिल के प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:
बिना वैध पासपोर्ट या वीजा के भारत में प्रवेश करने वाले विदेशियों को 5 साल तक की सजा या 5 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों।
फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर 7 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना।
होटल, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों को विदेशियों की जानकारी देना अनिवार्य।
भारत-बांग्लादेश सीमा की स्थिति:
शाह ने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से 1,653 किलोमीटर पर फेंसिंग पूरी हो चुकी है। बाकी 563 किलोमीटर में से 112 किलोमीटर पर भौगोलिक कारणों से फेंसिंग संभव नहीं है, लेकिन 450 किलोमीटर का काम बंगाल सरकार के असहयोग की वजह से अटका हुआ है। उन्होंने कहा, "मैंने खुद ममता बनर्जी को 10 पत्र लिखे और गृह सचिव ने बंगाल के मुख्य सचिव के साथ 7 बैठकें कीं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।"
TMC का जवाब:
TMC सांसद सौगत रॉय ने शाह के आरोपों को 'निराधार' करार दिया। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार फेंसिंग में देरी के लिए हमें जिम्मेदार नहीं ठहरा सकती। बीजेपी अगले 100 साल तक बंगाल में सत्ता में नहीं आएगी।" TMC ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है और राजनीतिक फायदा उठाने के लिए बंगाल को निशाना बना रही है।
विपक्ष की मांग:
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह बिल केंद्र को 'मनमानी शक्तियां' देता है और इमिग्रेशन अधिकारियों के फैसले को अंतिम मानता है। अन्य विपक्षी सांसदों ने भी इस मांग का समर्थन किया, लेकिन बिल ध्वनि मत से पास हो गया।
इस बिल के पास होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया, तो कुछ ने इसे बंगाल के खिलाफ राजनीति करार दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। शाह ने कहा, "2026 में बंगाल में कमल खिलेगा और घुसपैठ का अंत होगा।"