फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसा प्रयोग किया है जिसने टेक्नोलॉजी की दुनिया में नई बहस छेड़ दी है। दावा यह नहीं है कि अब पूरे शहर हवा से बिजली चलाने लगेंगे, बल्कि असली उपलब्धि यह है कि वैज्ञानिकों ने हवा में ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करने का तरीका खोज लिया है। यही वजह है कि इस रिसर्च को भविष्य की वायरलेस पावर टेक्नोलॉजी की बड़ी वैज्ञानिक सफलता माना जा रहा है।
इस प्रयोग की सबसे दिलचस्प बात है “अकोस्टिक वायर” यानी ध्वनि से बना अदृश्य तार। वैज्ञानिकों ने अल्ट्रासोनिक साउंड वेव्स का इस्तेमाल करके हवा में ऐसा रास्ता तैयार किया, जिसे इलेक्ट्रिक स्पार्क फॉलो कर सके। आसान भाषा में कहें तो आवाज़ की मदद से हवा के भीतर बिजली के लिए एक अस्थायी मार्ग बनाया गया।
सुनने में यह किसी हॉलीवुड फिल्म जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे असली विज्ञान काम कर रहा है। रिसर्च के अनुसार, हाई-इंटेंसिटी अल्ट्रासोनिक वेव्स हवा की density में बेहद सूक्ष्म बदलाव करती हैं। इससे एक नियंत्रित चैनल बनता है, जिसके जरिए छोटी मात्रा में ऊर्जा को तय दिशा में भेजा जा सकता है।
हालांकि यहां एक बात समझना बेहद जरूरी है।
फिलहाल वैज्ञानिक पूरे घर या शहर को बिजली देने में सफल नहीं हुए हैं। अभी यह तकनीक बहुत शुरुआती स्तर पर है और छोटे इलेक्ट्रॉनिक सेंसर या कम ऊर्जा वाले उपकरणों तक सीमित है। यानी सोशल मीडिया पर जो दावे किए जा रहे हैं कि “अब बिजली के तार खत्म हो जाएंगे”, वे अभी वास्तविकता से काफी दूर हैं।
लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि यह खोज मामूली है।
असल में यह वैज्ञानिक सफलता ऊर्जा ट्रांसफर से ज्यादा “ऊर्जा को नियंत्रित करने” में है। यही तकनीक आने वाले समय में मेडिकल साइंस, रोबोटिक्स और स्मार्ट डिवाइसेज की दुनिया बदल सकती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि भविष्य में शरीर के भीतर लगे मेडिकल इम्प्लांट बिना सर्जरी के चार्ज हो सकते हैं। फैक्ट्रियों में हजारों सेंसर बिना बैटरी बदले वर्षों तक काम कर सकते हैं और स्मार्ट होम्स में कई डिवाइसेज बिना चार्जर के चलाए जा सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह विचार पूरी तरह नया भी नहीं है। करीब एक सदी पहले महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने वायरलेस बिजली का सपना देखा था। उस दौर में तकनीक सीमित थी, इसलिए उनका सपना अधूरा रह गया। अब आधुनिक रिसर्च उसी दिशा में नए तरीके तलाश रही है।
फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी, यूनिवर्सिटी ऑफ ओउलू और आल्टो यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों से जुड़ी यह रिसर्च फिलहाल प्रयोगशाला तक सीमित है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में बिजली को सुरक्षित और किफायती तरीके से भेजना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है।
यही कारण है कि आने वाले वर्षों में पारंपरिक बिजली ग्रिड और तारों का महत्व खत्म होने वाला नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि यह तकनीक भविष्य के लिए एक नई खिड़की खोल रही है। ठीक वैसे ही जैसे कभी Wi-Fi को लोग अविश्वसनीय मानते थे और आज वही हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
हो सकता है आने वाले दशकों में हम ऐसी दुनिया देखें जहां चार्जर ढूंढना पुरानी आदत बन जाए। फिलहाल यह सपना पूरी तरह सच नहीं हुआ है, लेकिन विज्ञान ने उस दिशा में एक दिलचस्प कदम जरूर बढ़ा दिया है।