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Saturday, June 20, 2026

टेक्नोलॉजी

AI का महाबुलबुला: जब मशीनों पर भरोसा महंगा पड़ गया - संजय सक्सैना

छंटनी, अरबों डॉलर का खर्च और इंसानी दिमाग की वापसी की हैरान कर देने वाली कहानी ! सिलिकॉन वैली की एक चमचमाती इमारत के बोर्डरूम में वर्ष 2024 की एक सुबह उत्साह का माहौल था। कंपनी के शीर्ष अधिकारी भविष्य की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे। प्रस्तुति की स्क्रीन पर बड़े-बड़े दावे चमक रहे थे—“AI हमारी उत्पादकता दोगुनी कर देगा”, “हजारों कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं रहेगी” और “लागत घटेगी, मुनाफा बढ़ेगा।

धरती पर नहीं, अब अंतरिक्ष में बनेगा पावर ग्रिड: चीन की नई तकनीक से बदल सकता है ऊर्जा का भविष्य ! - विश्लेषक संजय सक्सेना

वायरलेस पावर ट्रांसमिशन की दिशा में बड़ी उपलब्धि, अंतरिक्ष से पृथ्वी तक बिजली भेजने की तैयारी ! विश्लेषक संजय सक्सेना ने अपने पिछले लेख जिसका शीर्षक “बिजली बहेगी हवा में? फिनलैंड की नई खोज” है में लिखा था कि वास्तविक वैज्ञानिक उपलब्धि केवल ऊर्जा उत्पादन में नहीं, बल्कि हवा के भीतर ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता में निहित है। उन्होंने इसे भविष्य के मेडिकल साइंस, रोबोटिक्स, स्मार्ट डिवाइसेज और वायरलेस ऊर्जा नेटवर्क की आधारशिला बताया था। अब चीन की नई वैज्ञानिक उपलब्धि उसी अवधारणा को प्रयोगशाला से निकालकर अंतरिक्ष तकनीक की वास्तविक दुनिया में बदलती दिखाई दे रही है। आइए जानते हैं, संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, के इस लेख के माध्यम से।

बिजली बहेगी हवा में ? फिनलैंड की नई खोज - संजय सक्सेना

कल्पना कीजिए… आप घर में कदम रखें और आपका मोबाइल अपने आप चार्ज होने लगे। दीवारों पर प्लग न हों, फर्श पर तारों का जाल न हो और मशीनें बिना केबल के काम करें। कुछ साल पहले तक यह सिर्फ साइंस फिक्शन फिल्मों की कल्पना लगती थी, लेकिन अब विज्ञान उस दिशा में छोटे-छोटे कदम बढ़ाने लगा है। आइए जानते हैं, संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, के इस लेख के माध्यम से।

तेजस: एक विमान, कई देशों की कहानी — आत्मनिर्भरता की परतों के पीछे की सच्चाई - संजय सक्सैना

नई दिल्ली के एक हैंगर में पंक्तिबद्ध खड़े लड़ाकू विमान चमक रहे हैं। उनकी धातु की सतह पर रोशनी पड़ते ही ऐसा लगता है मानो वे किसी भी क्षण आकाश को चीरने के लिए तैयार हों। ये हैं HAL Tejas—भारत की महत्वाकांक्षा, तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता के सपने का प्रतीक। लेकिन इस शांत दृश्य के भीतर एक असहज सच्चाई छिपी है। ये विमान तैयार हैं, पर पूरी तरह “अपने” नहीं हैं। इनकी कहानी केवल भारत की नहीं, बल्कि कई देशों की साझी कहानी है। आइए जानते हैं, संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक एवं विचारक के इस लेख के माध्यम से।

टेक्नोलॉजी / November 27, 2025
सौर ऊर्जा की चमक क्यों मंद पड़ने लगी? ऊर्जा क्रांति की उलझन का सबसे विस्तृत विश्लेषण - संजय सक्सेना

संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, बताते हैं कि कल्पना कीजिए—ऐसा देश जहां साल भर सूरज चमकता रहता है, वहां सौर बिजली इतनी ज्यादा बन रही है कि उसे रोककर रखना पड़ रहा है। फैक्टरियों में मशीनें चल रही हैं, सौर पैनल तैयार हो रहे हैं, लेकिन खरीदार नजर नहीं आ रहे। क्या यह भारत की सौर क्रांति का पहला बड़ा संकट है? आइए जानते हैं, संजय सक्सेना के इस लेख के माध्यम से।

टेक्नोलॉजी / October 8, 2025
धरती की धुरी खिसकी, सिकुड़ा समय: चीन की इंजीनियरिंग ने बदल डाली पृथ्वी की चाल, नासा का डरावना खुलासा - संजय सक्सैना

संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, इस लेख के माध्यम से बताते हैं कि हमारे ग्रह की गति का स्थिरता शायद हमारी आंखों से ओझल हो, लेकिन क्या होता अगर हम जानते कि हमारे द्वारा की गई कोई एक परियोजना, पृथ्वी के घूर्णन की गति को बदल सकती है? हां, आपने सही पढ़ा! नासा ने हाल ही में जो खुलासा किया है, वह हमारी दुनिया की संरचना पर इंसान के द्वारा किए गए एक विशाल निर्माण के प्रभाव को दर्शाता है। यह खुलासा चीन के थ्री गॉर्जेस डैम से जुड़ा हुआ है, जो पृथ्वी के घूर्णन में बदलाव का कारण बन चुका है।

टेक्नोलॉजी / September 26, 2025
दुनिया का पहला कैमरा जो इंसान के शरीर के अंदर की तस्वीरें ले सकेगा: चिकित्सा जगत में नई क्रांति - संजय सक्सैना

क्या होगा अगर हम शरीर के अंदर की क्रियाओं को बिना किसी सर्जरी या आक्रमक तरीके से देख सकें? यह विचार अब सच होने जा रहा है।आइए जानते हैं, संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, के इस लेख के माध्यम से।

टेक्नोलॉजी / September 18, 2025
क्या तकनीक मृत प्रियजनों को वापस ला सकती है? - संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक

संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, बताते हैं कि सनातन धर्म में आत्मा को अमर माना जाता है। यह कभी नष्ट नहीं होती, बल्कि एक शरीर छोड़कर दूसरे में प्रवेश करती है। हम मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि एक बदलाव मानते हैं। लेकिन क्या आपने सोचा कि तकनीक की मदद से हम उन प्रियजनों से फिर से बात कर सकते हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं? संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, इसे कोई चमत्कार नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक की हकीकत मानते हैं।

टेक्नोलॉजी / September 8, 2025
सिंथेटिक इंटेलिजेंस (SI): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आगे की क्रांति? - संजय सक्सेना

संजय सक्सेना - कल्पना करें एक ऐसी मशीन की, जो सिर्फ निर्देशों का पालन न करे, बल्कि खुद सोचे, भावनाएँ महसूस करे और अपनी इच्छाएँ व्यक्त करे। तकनीकी विशेषज्ञ इसे सिंथेटिक इंटेलिजेंस (SI) कहते हैं—यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कई कदम आगे की तकनीक है। यह मशीनें क्या सिर्फ हमारी सहायक रहेंगी, या इंसानों की तरह स्वतंत्र रूप से सोचने और निर्णय लेने वाली एक नई सत्ता बन जाएँगी? संजय सक्सेना का मानना है कि यह सवाल न केवल तकनीकी, बल्कि दार्शनिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मानवता के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

2025 Human Development Report : Artificial Intelligence के युग में

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने 6 मई 2025 को अपनी 2025 मानव विकास रिपोर्ट जारी की, जिसका शीर्षक है "A Matter of Choice: People and Possibilities in the Age of AI"। यह रिपोर्ट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के मानव विकास पर गहन प्रभावों, अवसरों, और जोखिमों का विश्लेषण करती है, साथ ही नीतिगत पसंदों के माध्यम से भविष्य को आकार देने की आवश्यकता पर बल देती है। वैश्विक मानव विकास सूचकांक (HDI) में 35 वर्षों में सबसे धीमी प्रगति के बीच, यह रिपोर्ट AI को एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है, जो सही दृष्टिकोण के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, और आर्थिक समृद्धि में क्रांति ला सकती है।

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