राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा, "हम एक विचारधारात्मक लड़ाई लड़ रहे हैं। यह लड़ाई कठिन है, लेकिन हमने इससे कहीं बड़ी लड़ाइयां लड़ी हैं। हमने ब्रिटिश साम्राज्य से मुकाबला किया और उन्हें देश से बाहर किया। उनके सामने बीजेपी और आरएसएस मजाक हैं।" उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और बीजेपी को हराने के लिए तैयार रहने की अपील की। गांधी ने यह भी कहा कि बीजेपी और आरएसएस देश को बांटने का काम कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस की विचारधारा सभी को बराबरी और सम्मान देने की है।
उन्होंने बीजेपी पर देश के संसाधनों को कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को सौंपने का आरोप लगाया। राहुल ने कहा, "आप देख सकते हैं कि दो-तीन कारोबारी ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह काम कर रहे हैं। वे सब कुछ अपने पास रखते हैं- मीडिया, टेलीकॉम, बंदरगाह, रक्षा सौदे- जो चाहते हैं, उन्हें मिल जाता है। यह वह भारत नहीं है, जो कांग्रेस ने बनाया था। हमारा सपना एक ऐसा भारत था, जहां हर कोई सपने देख सके और उन्हें पूरा कर सके।"
राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों को पार्टी की नींव बताते हुए कहा, "आपके बिना कांग्रेस न तो आगे बढ़ सकती है, न ही सफल हो सकती है। हमारी लड़ाई सिर्फ बीजेपी-आरएसएस से नहीं, बल्कि एक ऐसे भारत के लिए है, जहां हर नागरिक, हर समुदाय को सपने देखने और उन्हें हासिल करने का हक हो।" उन्होंने कार्यकर्ताओं से कमजोर वर्गों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर हमले होने पर उनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी लेने को कहा।
इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे, जिन्होंने कहा कि पार्टी की विचारधारा मजबूत है, लेकिन सत्ता के बिना इसे लागू नहीं किया जा सकता। खड़गे ने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस 20-30 सीटें और जीत जाती, तो आज केंद्र में सरकार बन सकती थी।
बीजेपी ने राहुल गांधी के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "राहुल गांधी सपनों की दुनिया में जी रहे हैं। जनता ने उन्हें बार-बार नकारा है और वे अब भी बीजेपी को कमजोर समझने की भूल कर रहे हैं।" वहीं, कांग्रेस समर्थकों का मानना है कि यह बयान कार्यकर्ताओं में जोश भरने और बीजेपी के खिलाफ एकजुटता का संदेश देने के लिए है।