News Desk / News Delhi /April 24, 2026
बढ़ती महंगाई केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह एक आम आदमी के उन सपनों को भी निगल जाती है जो वह बरसों से संजोता है। साहित्यकार डॉ. मधुकांत की लघुकथा 'चांदी' इसी कड़वी सच्चाई को बयां करती है।
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