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Thursday, January 8, 2026

24JT NEWSDESK / Udaipur /December 14, 2025

काशी तमिल संगमम् 4.0 के दौरान केंद्रीय शास्त्रीय भाषा संस्थान (सीआईसीटी) का स्टॉल तमिल भाषा, साहित्य और संस्कृति के अध्ययन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। इस स्टॉल के माध्यम से सीआईसीटी ने “तमिल करकलाम” (तमिल सीखें) पहल के अंतर्गत तमिल शास्त्रीय भाषा को सरल, सुलभ और बहुभाषी स्वरूप में प्रस्तुत किया है।

"काशी तमिल संगमम् 4.0 में सीआईसीटी का स्टॉल बना तमिल भाषा और संस्कृति का केंद्र, ‘तमिल करकलाम’ से सीखना हुआ सरल" | Photo Source : PIB
देश / काशी तमिल संगमम् 4.0 में सीआईसीटी का स्टॉल बना तमिल भाषा और संस्कृति का केंद्र, ‘तमिल करकलाम’ से सीखना हुआ सरल

स्टॉल पर तमिल शास्त्रीय ग्रंथों का हिन्दी अनुवाद उपलब्ध है, साथ ही हिन्दी, अंग्रेज़ी, थाई सहित कई अन्य भाषाओं में पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं, ताकि काशी और तमिलनाडु से आए प्रतिनिधि तमिल साहित्य को सहजता से समझ सकें। विशेष रूप से तिरुक्कुरल ग्रंथ यहाँ मौजूद है, जिसे लगभग 300 वर्ष पुराना माना जाता है। यह ग्रंथ तीन भागों—धर्म, अर्थ और प्रेम—में विभाजित है और तमिल समाज का नैतिक एवं दार्शनिक आधार प्रस्तुत करता है।

सीआईसीटी ने काशी और तमिल संस्कृति के ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंधों को उजागर करते हुए “Kashi as etched on the Tamil Indian Book” नामक विशेष अंतर-सांस्कृतिक पुस्तक भी प्रकाशित की है।

स्टॉल पर इंटरैक्टिव लर्निंग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें शिक्षक पांच प्रमुख पुस्तकों के माध्यम से सरल व्याकरण, तमिल शब्दकोश, संवाद अभ्यास और अक्षर लेखन सिखा रहे हैं। चार्ट और दृश्य सामग्री के प्रयोग से बच्चों और नवशिक्षार्थियों के लिए सीखना आसान और रोचक हो गया है। इसके अतिरिक्त पीएम ई-विद्या पहल के तहत ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से भी तमिल भाषा का शिक्षण कराया जा रहा है।

स्टॉल पर उपलब्ध प्रमुख पुस्तकें हैं: तमिल की प्रथम व्याकरणिक पुस्तक तोळ्काप्पियम (Tolkappiyam), संगम और पोस्ट-संगम साहित्य, कला साहित्य (18 भागों में) और तमिल शोध से संबंधित अनेक ग्रंथ।

सीआईसीटी के निदेशक डॉ. आर. चन्द्रशेखर और रजिस्ट्रार डॉ. आर. भुवनेश्वरी के मार्गदर्शन में स्टॉल का संचालन किया जा रहा है। स्टॉल टीम में डॉ. देवी, डॉ. कार्तिक और डॉ. पियरस्वामी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

वाराणसी की स्थानीय निवासी साजिया ने कहा, “पहले मुझे लगता था कि तमिल भाषा सीखना कठिन होगा, लेकिन ‘तमिल करकलाम’ के माध्यम से यह बहुत सरल और रोचक हो गया है। हिन्दी में अनुवादित पुस्तकों, चार्ट और संवाद अभ्यास से भाषा समझना आसान हो गया है। इंटरैक्टिव क्लास और शिक्षकों का मार्गदर्शन मुझे तमिल अक्षर, शब्द और सामान्य बातचीत सीखने में आत्मविश्वास दे रहा है।”

साजिया ने कहा कि ऐसे मंच स्थानीय युवाओं को नई भाषाएँ सीखने और अन्य संस्कृतियों को समझने का अनूठा अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सीआईसीटी और काशी तमिल संगमम् 4.0 की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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