इसी दिशा में अब एक महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। City University of Hong Kong के वैज्ञानिकों ने ऐसा रंगीन (Colourful) स्मार्ट कूलिंग पेंट विकसित किया है, जो केवल सुंदर दिखता ही नहीं, बल्कि तेज धूप में भी सतह का तापमान वातावरण की तुलना में 9 डिग्री सेल्सियस तक कम रखने में सक्षम है। सबसे खास बात यह है कि यह पारंपरिक कूलिंग पेंट की तरह केवल सफेद रंग तक सीमित नहीं है। यह तकनीक जून 2026 में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Nature Energy में प्रकाशित हुई है।
आखिर घर गर्म क्यों हो जाते हैं?
किसी भी इमारत पर सूर्य की रोशनी पड़ने पर तीन प्रक्रियाएँ होती हैं—
◦ कुछ प्रकाश वापस परावर्तित (Reflect) हो जाता है।
◦ कुछ ऊर्जा दीवार या छत द्वारा अवशोषित (Absorb) कर ली जाती है।
◦ यही अवशोषित ऊर्जा बाद में गर्मी के रूप में कमरे के भीतर और वातावरण में फैलती है।
गहरे रंग की सतहें अधिक सौर ऊर्जा सोखती हैं जबकि सफेद सतहें उसे वापस लौटा देती हैं। यही कारण है कि पारंपरिक "कूल रूफ" (Cool Roof) तकनीक में सफेद रंग का उपयोग किया जाता है।
लेकिन समस्या यह थी कि अधिकांश लोग अपनी इमारतों को केवल सफेद रंग में नहीं रंगना चाहते। यही चुनौती वैज्ञानिकों के सामने थी—क्या कोई ऐसा रंगीन पेंट बनाया जा सकता है जो सुंदर भी लगे और सफेद पेंट जितना ठंडा भी रखे?
नई तकनीक ने कैसे सुलझाई यह समस्या?
इस शोध का नेतृत्व प्रोफेसर Dangyuan Lei और उनकी टीम ने किया। उन्होंने पौधों से प्राप्त Ethyl Cellulose नामक बायोमास-आधारित पदार्थ का उपयोग करके ऐसा पेंट विकसित किया जो सूखने के दौरान स्वयं दो परतों (Self-Stratification) में विभाजित हो जाता है।
यानी पेंट लगाने के बाद अलग-अलग बेस कोट और रंगीन कोट लगाने की आवश्यकता नहीं रहती।
सूखते समय—
◦ ऊपरी पतली परत रंग उत्पन्न करती है।
◦ निचली सूक्ष्म छिद्रों वाली परत सूर्य की अधिकांश ऊर्जा को वापस परावर्तित करती है।
इसी कारण इसे Self-Assembling या Self-Stratifying Cooling Paint कहा जा रहा है।
शोधकर्ताओं ने अपने पेपर में लिखा है:
"Our one-step phase-separation approach simplifies fabrication while maintaining excellent daytime radiative cooling performance."
अर्थात एक ही चरण में बनने वाली यह संरचना निर्माण प्रक्रिया को आसान बनाती है और उच्च स्तर की कूलिंग क्षमता भी बनाए रखती है।
विज्ञान क्या कहता है? रंग होते हुए भी ठंडा कैसे रहता है?
यहीं इस तकनीक की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि छिपी है।
सामान्य रंगीन पेंट में रंग बनाने वाले पिगमेंट सूर्य की ऊर्जा को अवशोषित कर लेते हैं। परिणामस्वरूप सतह गर्म हो जाती है।
लेकिन इस नई तकनीक में रंग केवल रासायनिक पिगमेंट से नहीं बनते।
वैज्ञानिकों ने Thin-film interference नामक ऑप्टिकल सिद्धांत का उपयोग किया है।
यदि आपने कभी साबुन के बुलबुले या तितली के पंखों पर चमकते हुए बदलते रंग देखे हों, तो वही सिद्धांत यहाँ भी लागू होता है।
1. अत्यंत पतली परतों से गुजरते समय प्रकाश की विभिन्न तरंगें एक-दूसरे के साथ हस्तक्षेप (Interference) करती हैं और विशिष्ट रंग दिखाई देते हैं।
इससे गहरे पिगमेंट की आवश्यकता कम हो जाती है और सौर ऊर्जा का अवशोषण भी घटता है।
97 प्रतिशत धूप वापस कैसे चली जाती है?
शोध के अनुसार इस पेंट की निचली परत अत्यधिक सूक्ष्म छिद्रों (Microporous Layer) से बनी होती है।
जब सूर्य का प्रकाश इस पर पड़ता है तो वह बार-बार इन सूक्ष्म संरचनाओं से टकराकर वापस परावर्तित हो जाता है।
इसी कारण पेंट लगभग 97% सौर विकिरण (Solar Reflectance) वापस लौटा देता है।
इसका अर्थ यह नहीं कि 97 प्रतिशत गर्मी समाप्त हो जाती है, बल्कि सूर्य से आने वाली ऊर्जा का अधिकांश भाग दीवार तक पहुँचने से पहले ही वापस अंतरिक्ष की ओर लौट जाता है।
केवल धूप लौटाना ही काफी नहीं
1. यदि केवल धूप लौटा दी जाए तो भी कुछ गर्मी सतह में पहुँच ही जाती है।
यहीं दूसरी तकनीक काम करती है जिसे Passive Daytime Radiative Cooling कहा जाता है।
हर वस्तु लगातार अवरक्त (Infrared) विकिरण के रूप में ऊष्मा छोड़ती रहती है।
पृथ्वी के वायुमंडल में 8–13 माइक्रोन की तरंगदैर्ध्य वाला एक प्राकृतिक "Atmospheric Window" होता है।
यदि कोई सतह इसी सीमा में ऊष्मा विकिरित करे तो वह ऊर्जा वातावरण द्वारा रोकी नहीं जाती बल्कि अंतरिक्ष की ओर निकल जाती है।
नई कोटिंग इसी गुण का लाभ उठाती है।
यानी यह केवल धूप को वापस नहीं भेजती बल्कि पहले से मौजूद गर्मी को भी लगातार बाहर निकालती रहती है।
यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे Passive Cooling कहते हैं—इसमें बिजली, पंखा या कंप्रेसर किसी की आवश्यकता नहीं होती।
क्या वास्तव में 9°C ठंडा रखना संभव है?
Nature Energy में प्रकाशित प्रयोगों के अनुसार लगभग 800 W/m² की धूप में परीक्षण के दौरान इस कोटिंग की सतह आसपास के वातावरण की तुलना में लगभग 9°C कम तापमान पर बनी रही।
1. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह परिणाम सतह (Surface) का है, पूरे कमरे का नहीं।
2. कमरे का वास्तविक तापमान भवन की डिजाइन, इन्सुलेशन, खिड़कियों, हवा के प्रवाह और स्थानीय मौसम पर भी निर्भर करेगा।
इसलिए "घर 9°C ठंडा हो जाएगा" कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। सही निष्कर्ष यह है कि पेंट की सतह का तापमान लगभग 9°C तक कम पाया गया, जिससे भवन के भीतर गर्मी का प्रवेश कम हो सकता है।
शहरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पेंट?
आज अधिकांश महानगर Urban Heat Island Effect से जूझ रहे हैं।
कंक्रीट, डामर और कांच दिनभर गर्मी जमा करते हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ते रहते हैं। परिणामस्वरूप शहर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कई डिग्री अधिक गर्म हो जाते हैं।
यदि बड़ी संख्या में इमारतों पर ऐसे उच्च परावर्तक कूलिंग पेंट लगाए जाएँ तो—
◦ भवन कम गर्म होंगे,
◦ एयर कंडीशनर की जरूरत घट सकती है,
◦ बिजली ग्रिड पर दबाव कम होगा,
◦ और शहरी तापमान में भी कमी लाने में मदद मिल सकती है।
पर्यावरण को भी होगा लाभ
आज विश्व स्तर पर भवनों की कूलिंग में बड़ी मात्रा में बिजली खर्च होती है। यदि इमारतें स्वाभाविक रूप से कम गर्म हों तो एयर कंडीशनर कम चलेंगे।
इससे—
◦ बिजली की खपत घटेगी,
◦ जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन कम होगा,
◦ और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस पेंट में प्रयुक्त Ethyl Cellulose पौधों से प्राप्त बायोमास आधारित सामग्री है, जिससे यह पारंपरिक पेट्रोलियम आधारित कोटिंग्स की तुलना में अधिक टिकाऊ विकल्प माना जा रहा है।
क्या यह बाजार में उपलब्ध है?
फिलहाल यह तकनीक रिसर्च चरण में है। वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला और बाहरी परीक्षणों में इसके उत्साहजनक परिणाम प्रस्तुत किए हैं, लेकिन अभी इसका बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन लागत नियंत्रित रहती है और दीर्घकालिक टिकाऊपन व्यावसायिक स्तर पर भी साबित होता है, तो आने वाले वर्षों में यह तकनीक भवन निर्माण उद्योग में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
शोधकर्ताओं के अनुसार इस तकनीक की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल बेहतर कूलिंग नहीं, बल्कि निर्माण प्रक्रिया का सरल होना है। पहले जहाँ रंगीन कूलिंग पेंट के लिए अलग-अलग परतें बनानी पड़ती थीं, वहीं अब एक ही कोटिंग सूखते समय स्वयं आवश्यक संरचना बना लेती है।
Nature Energy की Research Briefing में भी कहा गया है कि यह कोटिंग धूप में "sub-ambient daytime cooling" यानी वातावरण से कम तापमान बनाए रखने में सक्षम है।
संजय सक्सैना वरिष्ठ विश्लेषक एवं विचारक -
जलवायु परिवर्तन के दौर में केवल अधिक शक्तिशाली एयर कंडीशनर बनाना समाधान नहीं है। भविष्य की इमारतें ऐसी होंगी जो स्वयं कम गर्म हों। यही सोच Passive Radiative Cooling जैसी तकनीकों को वैश्विक शोध का प्रमुख विषय बना रही है।
हांगकांग के वैज्ञानिकों का यह रंगीन सेल्फ-असेम्बलिंग कूलिंग पेंट उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर सफल होती है, तो भविष्य में लोग अपनी पसंद के रंगों से घर सजाने के साथ-साथ बिजली की बचत और गर्मी से राहत—दोनों का लाभ उठा सकेंगे।