समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण सबसे पर्यावरण अनुकूल और सबसे विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत है। यह कोई विकल्प नहीं, बल्कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा बचत का अर्थ केवल कम उपयोग नहीं, बल्कि ऊर्जा का बुद्धिमानी, जिम्मेदारी और कुशलता से उपयोग करना है। अनावश्यक बिजली खपत से बचना, ऊर्जा-कुशल उपकरणों को अपनाना, प्राकृतिक प्रकाश और वेंटिलेशन का उपयोग करना तथा सौर एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना न केवल ऊर्जा संरक्षण में सहायक है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को भी कम करता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ वायु, सुरक्षित जल स्रोत और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने में ऊर्जा संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की प्रत्येक इकाई की बचत प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी संवेदनशीलता का प्रतीक है।
युवाओं की भूमिका अहम
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि यदि युवा और बच्चे ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक होकर व्यवहार में बदलाव लाएं, तो इस क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है और देश के सतत विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है।
स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा से सशक्तिकरण
उन्होंने कहा कि सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच से समुदाय सशक्त होते हैं, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और विकास के नए अवसर सृजित होते हैं। हरित ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समावेशी विकास और सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है।
सरकारी पहलों से मिल रही मजबूती
राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि इनसे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो रही है। उन्होंने बताया कि सरकार नवीकरणीय ऊर्जा उपभोग दायित्व और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा दे रही है। वर्ष 2023-24 में ऊर्जा दक्षता के प्रयासों से 53.60 मिलियन टन तेल के समतुल्य ऊर्जा की बचत हुई है, जिससे आर्थिक लाभ के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
व्यवहार में बदलाव जरूरी
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन की सफलता के लिए हर क्षेत्र और हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। ऊर्जा दक्षता लाने के लिए व्यवहार में बदलाव बेहद जरूरी है। प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण और संतुलित जीवनशैली अपनाने की चेतना भारतीय संस्कृति की मूल भावना है, जो प्रधानमंत्री के संदेश “पर्यावरण के लिए जीवनशैली – एलआईएफई” का आधार भी है।
समापन पर राष्ट्रपति ने ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत सभी हितधारकों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक जिम्मेदारी, साझेदारी और जनभागीदारी के माध्यम से भारत ऊर्जा संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा और हरित भविष्य के लक्ष्य को प्राप्त करेगा।