वहीं डॉ. नंदलाल महर्षि स्मृति हिन्दी सृजन पुरस्कार जयपुर के कथाकार एवं उपन्यासकार डॉ. सूरजसिंह नेगी को उनकी औपन्यासिक कृति भावेश जो कह न सका’ के लिए प्रदान किया जाएगा।
समिति के अनुसार सभी राष्ट्रीय सृजन पुरस्कार 27 सितंबर 2026 को श्रीडूंगरगढ़ में आयोजित समारोह में प्रदान किए जाएंगे। पुरस्कार अर्पण समारोह के साथ साहित्यिक संगोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा।
मधुकांत की उपलब्धि हरियाणा के लिए गौरव : अंजना गर्ग
प्रज्ञा साहित्यिक मंच की सचिव
प्रोफेसर अंजना गर्ग ने मधुकांत को साहित्यश्री सम्मान के लिए चुने जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डॉ. मधुकांत की यह उपलब्धि मंच के साथ-साथ
हरियाणा और हरियाणवी साहित्य एवं संस्कृति के लिए भी गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि मधुकांत ने विभिन्न साहित्यिक विधाओं में
250 से अधिक साहित्यिक कृतियों का सृजन किया है। साहित्य अकादमी से सम्मानित हरियाणा के वरिष्ठ साहित्यकार मधुकांत की विशेष पहचान
रक्तदान जागरूकता से जुड़े साहित्य के कारण भी बनी है।
मधुकांत की साहित्यिक कृतियों का भारत की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हो चुका है तथा उनके साहित्य पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में शोध कार्य भी संपन्न हुए हैं।
पुरस्कार के साथ सम्मान-पत्र, स्मृति-चिह्न और शॉल
कार्यक्रम के आयोजन समन्वयक
महावीर माली ने बताया कि पुरस्कार अर्पण समारोह के साथ साहित्यिक संगोष्ठी भी आयोजित की जाएगी।
समिति के कोषाध्यक्ष
रामचन्द्र राठी के अनुसार, मलाराम माली स्मृति साहित्यश्री सम्मान के तहत
21 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी। वहीं अन्य पुरस्कारों के तहत
11-11 हजार रुपये, सम्मान-पत्र, स्मृति-चिह्न एवं शॉल प्रदान किए जाएंगे।
समिति के उपाध्यक्ष
सत्यदीप ने बताया कि समारोह में
‘समकालीन साहित्य और समाज’ से जुड़े विषय पर साहित्यिक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें साहित्य और समाज के बदलते संबंधों पर विचार-विमर्श होगा।
राष्ट्रीय सृजन पुरस्कारों की इस घोषणा के साथ हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों के सम्मान का एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। रोहतक के साहित्यकार मधुकांत को समिति के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान के लिए चुना जाना विशेष रूप से हरियाणा के साहित्यिक जगत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।