सड़क की चौड़ाई अब तय करेगी इमारत की ऊंचाई :
दिल्ली के भवन उपनियमों में यह मूल सिद्धांत शामिल है कि किसी भी इमारत की ऊंचाई सीधे उस सड़क की चौड़ाई पर निर्भर करती है जिस पर वह स्थित है।
व्यावहारिक रूप से नियमों का ढांचा यह संकेत देता है कि:
• संकरी सड़कों पर ऊंची इमारतों की अनुमति सीमित होती है
• मध्यम चौड़ाई वाली सड़कों पर मध्यम ऊंचाई की इमारतें संभव होती हैं
• चौड़ी सड़कों पर अधिक ऊंचाई और स्टिल्ट पार्किंग सहित निर्माण की अनुमति दी जाती है
प्रशासनिक स्तर पर यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड की पहुंच बाधित न हो और इमारतों में निकासी सुरक्षित तरीके से हो सके।
हालांकि यह स्पष्ट किया जाता है कि वास्तविक अनुमति हर मामले में केवल सड़क चौड़ाई ही नहीं, बल्कि भूमि उपयोग, FAR और स्थानीय जोनिंग नियमों पर भी निर्भर करती है।
सेटबैक और खुली जगह: सुरक्षा की पहली दीवार :
सेटबैक यानी इमारत और प्लॉट की सीमा के बीच छोड़ी गई खुली जगह निर्माण सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नीति के अनुसार छोटे और मध्यम आकार के प्लॉट्स में सामने और किनारों पर निश्चित खुली जगह अनिवार्य होती है। जैसे-जैसे प्लॉट बड़ा होता है और सड़क चौड़ी होती है, यह खुली जगह भी बढ़ती जाती है।
इसका उद्देश्य केवल वेंटिलेशन नहीं, बल्कि आग लगने की स्थिति में धुएं के फैलाव को नियंत्रित करना और आपातकालीन निकासी को संभव बनाना है।
FAR: असली निर्माण क्षमता तय करने वाला नियम :
Floor Area Ratio यानी FAR किसी भी प्लॉट पर कुल निर्माण क्षमता को निर्धारित करता है। यह तय करता है कि जमीन के क्षेत्रफल के अनुपात में कुल कितना निर्माण किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी क्षेत्र में FAR अधिक है तो वहां बहुमंजिला निर्माण संभव होता है, जबकि कम FAR वाले क्षेत्रों में निर्माण सीमित रहता है।
अधिकारियों का मानना है कि अधिकांश अवैध निर्माण मामलों में FAR का उल्लंघन या गलत उपयोग सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आता है।
फ्लोर, ऊंचाई और स्टिल्ट का वास्तविक संबंध :
दिल्ली में सामान्य रिहायशी निर्माण में स्टिल्ट पार्किंग के साथ बहुमंजिला भवनों की अनुमति दी जाती है, लेकिन इसकी ऊंचाई और फ्लोर संख्या कई तकनीकी मानकों पर निर्भर करती है।
फायर सेफ्टी मानकों के अनुसार जैसे ही कोई इमारत मध्यम से अधिक ऊंचाई श्रेणी में पहुंचती है, उसमें अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अनिवार्य हो जाते हैं, जिनमें फायर अलार्म, आपातकालीन सीढ़ियां और स्मोक कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं।
अधिकारियों का यह भी कहना है कि जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, जोखिम भी बढ़ता है, और इसलिए निरीक्षण की आवृत्ति भी बढ़ाई जाती है।
फायर NOC और सुरक्षा व्यवस्था पर सख्ती :
मालवीय नगर घटना के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि कई भवनों में फायर NOC या तो मौजूद नहीं है या फिर वास्तविक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया है।
अब ऐसे भवनों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है जिनमें:
• फायर एक्सटिंग्विशर कार्यरत नहीं हैं
• इमरजेंसी एग्जिट बाधित हैं
• फायर अलार्म सिस्टम निष्क्रिय हैं
• और बेसमेंट या ऊपरी मंजिलों का उपयोग नियमों के विपरीत किया जा रहा है
इन मामलों में प्रशासन सीलिंग और निर्माण ध्वस्तीकरण तक की कार्रवाई कर सकता है।
रिहायशी बिल्डर फ्लैट्स और आम नागरिकों पर असर :
इस पूरी कार्रवाई का सबसे बड़ा प्रभाव दिल्ली के रिहायशी बिल्डर फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स में रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है।
कई पुरानी सोसाइटियों में समय के साथ निर्माण में बदलाव, अवैध विस्तार या सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई है।
अब ऐसी सोसाइटियों को फायर सेफ्टी ऑडिट और निरीक्षण से गुजरना पड़ सकता है।
यदि किसी इमारत में गंभीर खामियां पाई जाती हैं, तो प्रशासन सुधार के निर्देश दे सकता है और अनुपालन न होने पर बिजली और पानी जैसी सेवाओं पर भी कार्रवाई संभव है।
हालांकि, जो सोसाइटियां पूरी तरह नियमों का पालन कर रही हैं, उन्हें तत्काल चिंता की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें भी नियमित सुरक्षा अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
अब बदल रहा है दृष्टिकोण: रोकथाम से पहले निरीक्षण :
प्रशासनिक स्तर पर अब दृष्टिकोण बदल गया है। पहले कार्रवाई मुख्य रूप से शिकायत या दुर्घटना के बाद होती थी, लेकिन अब नियमित निरीक्षण और जोखिम पहचान पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
उद्देश्य यह है कि ऐसी स्थितियों को रोका जाए जहां निर्माण नियमों की अनदेखी सीधे जनहानि का कारण बन सकती है।
संजय सक्सैना, वरिष्ठ विश्लेषक एवं विचारक :
दिल्ली में भवन निर्माण और सुरक्षा नियमों पर शुरू हुई यह सख्ती केवल एक अभियान नहीं, बल्कि शहरी नियोजन के दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत है। अब इमारत की वैधता केवल उसके अस्तित्व से नहीं, बल्कि उसकी ऊंचाई, संरचना, स्थान और सुरक्षा मानकों के पालन से तय होगी।
मालवीय नगर अग्निकांड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण में छोटी सी लापरवाही भी बड़े खतरे में बदल सकती है। आने वाले समय में यह निगरानी और अधिक कठोर होने की संभावना है, जिसका सीधा प्रभाव शहर के हर निवासी और हर निर्माण पर पड़ेगा।