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Monday, May 25, 2026

News Desk / News Delhi /May 22, 2026

उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “डिजाइनिंग एंड इम्प्लीमेंटिंग आउटकम बेस्ड एजुकेशन : ए पाथवे टू ट्रांसफॉर्मिंग टीचिंग एंड लर्निंग” का शुभारंभ शुक्रवार को विश्वविद्यालय के गोल्डन जुबली गेस्ट हाउस स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में हुआ। कार्यशाला का आयोजन नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा में गुणवत्ता आधारित शिक्षण एवं अधिगम प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

राजस्थान / सुखाड़िया विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी द्वारा आयोजित आउटकम आधारित शिक्षा पर कार्यशाला का शुभारंभ गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की दिशा में एमएलएसयू की नई पहल: प्रो. डागा

कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे सुखड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा ने कहा कि परिणाम आधारित शिक्षण प्रणाली वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ कौशल, नवाचार, विश्लेषणात्मक क्षमता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करना है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे पारंपरिक शिक्षण पद्धति से आगे बढ़कर परिणामोन्मुख एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण प्रणाली को अपनाएं।

आईक्यूएसी निदेशक एवं वाणिज्य महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. शूरवीर सिंह भाणावत ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय में पहली बार परिणाम आधारित शिक्षण प्रणाली पर इस प्रकार की व्यापक एवं व्यावहारिक कार्यशाला आयोजित की जा रही है। उन्होंने बताया कि आईक्यूएसी विश्वविद्यालय में गुणवत्ता उन्नयन, नवाचार एवं संस्थागत उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला शिक्षकों को पाठ्यक्रम निर्माण, शिक्षण विधियों एवं मूल्यांकन प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।

नई शिक्षा नीति के नोडल अधिकारी प्रो. के. बी. जोशी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में परिणाम आधारित शिक्षण प्रणाली को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षण की सफलता का आकलन केवल पाठ्यक्रम पूर्ण करने से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की वास्तविक सीखने की उपलब्धियों से होना चाहिए। उन्होंने कार्यशाला को शिक्षकों एवं अकादमिक प्रशासकों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं समयानुकूल पहल बताया।

कार्यशाला के संयोजक एवं भू-विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रितेश पुरोहित ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस दो दिवसीय कार्यक्रम में Outcome Based Education, Course Outcomes (COs), Program Outcomes (POs), Program Specific Outcomes (PSOs), Bloom’s Taxonomy, मूल्यांकन प्रणाली तथा SDGs आधारित पाठ्यक्रम निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों एवं अकादमिक हितधारकों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं परिणाम आधारित शिक्षण प्रणाली के लिए तैयार करना है।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता श्री वेंकेटश्वर विश्वविद्यालय गजरौला के ग्रुप वाईस चांसलर प्रो. (डॉ.) कृष्णकांत दवे ने परिणाम आधारित शिक्षण प्रणाली की अवधारणा, Program Outcomes (POs), Course Outcomes (COs), Program Specific Outcomes (PSOs) तथा Bloom’s Taxonomy पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षण, अधिगम एवं मूल्यांकन प्रक्रियाओं का परिणाम आधारित होना आवश्यक है।

कार्यशाला के प्रथम दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में PEO, PO, PSO एवं CO की महत्ता तथा उनकी प्रभावी मैपिंग पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए।

इस अवसर पर विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. सी. पी. जैन, कला महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. नीरज शर्मा, लॉ कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. आनंद पालीवाल, डॉ. जूही प्रधान सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक एवं आईक्यूएसी सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नेहा पालीवाल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन बॉटनी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हरीश द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस कार्यशाला में आईक्यू ए सी के कमेटी मेम्बर तथा हर विभाग से एक प्रतिनिधि तथा गीतांजलि विश्वविद्यालय से शिक्षकों ने भी भाग लिया।

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