पीजीआईएमएस के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने सफल ऑपरेशन पर चिकित्सकों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की बदौलत प्रदेश ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों के गंभीर मरीजों के लिए भी भरोसेमंद रेफरल सेंटर बन चुका है।
जांघ के इलाज के दौरान सामने आया फेफड़े में पेंच होने का मामला
ईएनटी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर
डॉ. रमन वडेरा ने बताया कि नारनौल निवासी मासूम
अनंत (बदला हुआ नाम) 13 जुलाई 2026 को बिस्तर से गिर गया था, जिससे उसकी बाईं जांघ की हड्डी टूट गई। प्रारंभिक उपचार के बाद जब 23 जुलाई को ऑपरेशन से पहले उसकी छाती का नियमित एक्स-रे कराया गया, तो रेडियोलॉजिस्ट भी हैरान रह गए। एक्स-रे में दाहिने फेफड़े की सांस की नली में लोहे का एक पेंच स्पष्ट दिखाई दिया।
परिजनों को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि बच्चे ने पेंच कब और कैसे निगल लिया। सबसे हैरानी की बात यह रही कि बच्चे में न खांसी, न सांस लेने में तकलीफ और न ही कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दिए।
सीटी स्कैन में हुई पुष्टि, सांस की नली पूरी तरह बंद होने का था खतरा
डॉ. वडेरा के अनुसार बच्चे को तुरंत पीजीआईएमएस रोहतक रेफर किया गया। यहां किए गए सीटी स्कैन में पुष्टि हुई कि पेंच दाहिने
ब्रोंकस इंटरमीडियस में फंसा हुआ है। यह स्थिति बेहद खतरनाक थी, क्योंकि पेंच किसी भी समय सांस की नली को पूरी तरह अवरुद्ध कर सकता था।
बिना चीरा लगाए निकाला गया पेंच
डॉ. रमन वडेरा और उनकी टीम ने
रीजिड ब्रोंकोस्कोपी तकनीक के माध्यम से जनरल एनेस्थीसिया में करीब दो घंटे तक ऑपरेशन किया। गले के रास्ते विशेष दूरबीन डालकर बिना किसी चीरे के पेंच को सावधानीपूर्वक बाहर निकाल लिया गया। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और बच्चे को किसी प्रकार की जटिलता नहीं हुई। फिलहाल उसकी स्थिति सामान्य है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
छोटे बच्चों को रखें ऐसी वस्तुओं से दूर
डॉ. रमन वडेरा ने कहा कि छह माह से अधिक उम्र के बच्चे अक्सर आसपास की वस्तुओं को मुंह में डालते हैं। पेंच, नट-बोल्ट, सिक्के, बटन बैटरी और खिलौनों के छोटे हिस्से बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। कई मामलों में सांस की नली में वस्तु फंसने के बावजूद कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। यदि बच्चे को अचानक तेज खांसी आए, आवाज बैठ जाए या वह बिना कारण चिड़चिड़ा हो जाए, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
आधुनिक सुविधाओं से जटिल मामलों का हो रहा सफल उपचार
ईएनटी विभागाध्यक्ष
डॉ. जगत सिंह ने बताया कि कुलपति
डॉ. एच.के. अग्रवाल और निदेशक
डॉ. एस.के. सिंघल के नेतृत्व में पीजीआईएमएस में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध है, जिसके कारण हरियाणा सहित पड़ोसी राज्यों के मरीज भी यहां विश्वास के साथ इलाज के लिए आते हैं।
विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता: कुलपति
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि पीजीआईएमएस प्रदेश का सबसे बड़ा और भरोसेमंद रेफरल सेंटर है, जहां जटिल से जटिल बीमारियों का उपचार आधुनिक तकनीकों से किया जाता है। उन्होंने कहा कि संस्थान में मरीजों को एक ही छत के नीचे विश्वस्तरीय जांच, आधुनिक मशीनें, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम, 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं, आईसीयू, वेंटिलेटर, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर और अन्य डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही सरकारी योजनाओं के तहत जरूरतमंद मरीजों को बेहतर और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि छोटे बच्चों को पेंच, सिक्के, बटन बैटरी और खिलौनों के छोटे हिस्सों से दूर रखें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।