Tranding
Wednesday, May 6, 2026

News Desk / News Delhi /April 23, 2026

रोहतक। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा सूर जयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें महाकवि सूरदास के काव्य की आधुनिक समय में प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर महाकवि सूर पुरस्कार से सम्मानित सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं प्रज्ञा संस्थान के संस्थापक डॉ. मधुकांत ने कहा कि लगभग छह सौ वर्ष पूर्व हरियाणा की पावन भूमि सीही में जन्मे सूरदास का काव्य आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम है।

हरियाणा / आधुनिक संदर्भ में भी प्रासंगिक है सूर काव्य: डॉ. मधुकांत

उन्होंने कहा कि सूरदास केवल हिंदी साहित्य ही नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य के मेरुदंड हैं। सूरसागर, साहित्य लहरी और सूरसारावली जैसे ग्रंथ आज भी अपनी गहनता और भावनात्मक अभिव्यक्ति के कारण प्रासंगिक बने हुए हैं। सूरदास के काव्य में निहित मनोविज्ञान विशेष रूप से उल्लेखनीय है, वहीं वात्सल्य भाव का उन्होंने अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है।

डॉ. मधुकांत ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें सूरदास के साहित्य से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में उनके द्वारा स्थापित मूल्यों को अपनाना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो. बरुण कुमार झा ने कहा कि सूर साहित्य भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। आज भी लोग सूर के पदों को गुनगुनाते हुए देखे जाते हैं, जो उनकी लोकप्रियता और जीवंतता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि इतिहास में सूरदास और तुलसीदास की भेंट का भी उल्लेख मिलता है, वहीं तानसेन द्वारा सूर के पदों को सुनकर सम्राट अकबर ने भी उनसे मिलने की इच्छा व्यक्त की थी।

उन्होंने आगे कहा कि सूरदास पुष्टिमार्ग के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं और दार्शनिक दृष्टि से उन्होंने महाप्रभु वल्लभाचार्य के शुद्धाद्वैतवाद का अनुसरण किया। यही कारण है कि उन्हें मानव हृदय के कोमल भावों का अद्वितीय कवि कहा जाता है। उनके काव्य में संयोग और वियोग दोनों ही भावों का सुंदर और प्रभावशाली चित्रण मिलता है। विशेष रूप से राधा-कृष्ण और गोपियों के प्रेम का वर्णन उनकी काव्य-कला को अनुपम बनाता है।

कार्यक्रम के दौरान माँ सरस्वती एवं महाकवि सूरदास की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। इस अवसर पर मानविकी संकाय के प्रो. ब्रह्म प्रकाश, डॉ. मीनू शर्मा, डॉ. जितेंद्र कुमार, निधि सहित अनेक विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

कार्यक्रम संयोजक हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. बाबूराम, डॉ. सुमन एवं डॉ. प्रवेश कुमारी ने मुख्य अतिथियों डॉ. मधुकांत और डॉ. श्यामलाल कौशल को स्मृति चिन्ह, श्रीफल और शॉल भेंटकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण और उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। सभी प्रतिभागियों ने महाकवि सूरदास के काव्य में निहित मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

Subscribe

Trending

24 Jobraa Times

भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को बनाये रखने व लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए सवंत्रता, समानता, बन्धुत्व व न्याय की निष्पक्ष पत्रकारिता l

Subscribe to Stay Connected

2025 © 24 JOBRAA - TIMES MEDIA & COMMUNICATION PVT. LTD. All Rights Reserved.