इस अवसर पर वाणिज्य महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रोफेसर शूरवीर सिंह भाणावत ने कहा कि बदलते वैश्विक परिद्रश्य में जेन जी के निवेश पैटर्न में काफी बदलाव आया है। यह पीढ़ी क्रिप्टो करेंसी, अंशों में विनियोग को प्राथमिकता देता है वही पुरानी पीढ़ी के लोग सोना और जमीन में निवेश करते है । इसलिए वर्तमान समय में विद्यार्थियों को निवेश के मूल सिद्धांतों को समझाना बहुत आवश्यक है ताकि सट्टा और निवेश में अंतर समझकर पोंजी स्कीम्स से दूर रहे।विद्यार्थियों को भविष्य की आर्थिक योजना बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।
कार्यक्रम समन्वयक लेखांकन एवं व्यवसायी सांख्यिकी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पारुल दशोरा ने बताया कि कार्यक्रम में 45 विद्यार्थियों की उपस्थिति रही जिन्होंने डीमेट अकाउंट , म्यूच्यूअल फंड, निवेश करने से पहले कंपनी के विश्लेषण आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की ।
सेबी के इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फण्ड अथॉरिटी के तहत कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक एवं मुख्य वक्ता गुरु नानक कॉलेज के प्राचार्य और पूर्व निदेशक फ़ैकल्टी ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज प्रो.अनिल कोठारी रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों को निवेश के विभिन्न पहलुओं, निवेश से जुड़े जोखिम और अवसरों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
जब किसी कारणवश कंपनियों द्वारा घोषित लाभांश अंशधारियों के पास नहीं पहुंच पाता है तो यह राशि सात वर्ष बाद इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फण्ड में हस्तांतरित का दी जाती है इसी राशि से सरकार निवेशकों के जागरूकता के लिए इस तरह के आयोजन कराती है ताकि लोगो में जागरूकता आए।
31 मार्च को इसमें लगभग 5774 करोड़ रुपये का शेष है ।
उल्लेखनीय है कि क्रिशा फाउंडेशन एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, जो वित्तीय साक्षरता, निवेशक शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता है।
कार्यक्रम में सह अधिष्ठाता डा. शिल्पा वर्डिया और डा. आशा शर्मा की उपस्थिति रही। अंत में डॉ दशोरा ने धन्यवाद ज्ञापित किया ।