वीडियो संदेश में दीपक धनखड़ ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक के समर्थन से देशभर के जागरूक युवा इस आंदोलन में भाग लेने के लिए एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने युवाओं से संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने युवाओं को "शिक्षित बनो, संगठित बनो और संघर्ष करो" का संदेश दिया था। आज समय आ गया है कि युवा शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता के लिए संगठित होकर अपनी बात रखें।
दीपक धनखड़ ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है। यदि हर सवाल उठाने वाले को देशद्रोही करार दिया जाएगा, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और शहीद-ए-आजम भगत सिंह जैसे महान व्यक्तित्वों ने भी अपने समय में व्यवस्था और सत्ता से सवाल किए थे।
उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि सत्ता से सवाल पूछना राष्ट्रविरोध नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का माध्यम है। जब छात्र परीक्षा में कथित धांधली या अनियमितताओं पर सवाल उठाते हैं, तो वे संविधान द्वारा प्रदत्त अपने अधिकारों का उपयोग कर रहे होते हैं।
दीपक धनखड़ ने कहा कि असहमति और राष्ट्रभक्ति एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। भारत का स्वतंत्रता आंदोलन इस सत्य का सबसे बड़ा प्रमाण है। इतिहास में अनेक स्वतंत्रता सेनानियों पर आरोप लगाए गए, लेकिन समय ने साबित किया कि वे राष्ट्र के विरोधी नहीं, बल्कि देश के भविष्य की आवाज थे।
वीडियो संदेश में उन्होंने आंदोलन में शामिल होने वाले युवाओं से पूर्णतः अहिंसक और अनुशासित रहने की अपील करते हुए कहा कि कुछ शरारती तत्व आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे में सभी प्रतिभागियों को संयम और जिम्मेदारी का परिचय देना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की हिंसा, तोड़फोड़ या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना आंदोलन के उद्देश्य के खिलाफ होगा।
दीपक धनखड़ ने कहा कि महात्मा गांधी ने दुनिया को दिखाया था कि शांतिपूर्ण संघर्ष के माध्यम से भी इतिहास बदला जा सकता है। परिवर्तन का मार्ग कभी आसान नहीं होता, लेकिन लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय की रक्षा के लिए संघर्ष आवश्यक है।
उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, जवाबदेही तय करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिसमें किसी भी छात्र को यह महसूस न हो कि उसकी मेहनत और भविष्य के साथ अन्याय हुआ है।
अपने संदेश के अंत में दीपक धनखड़ ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह संविधान, लोकतंत्र और सत्याग्रह के मार्ग पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि युवा हिंसा और नफरत का रास्ता नहीं अपनाएंगे, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों और जवाबदेही की मांग उठाते रहेंगे।
उन्होंने कहा, "हम सवाल पूछेंगे, जवाब मांगेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। राष्ट्र का भविष्य वही लोग लिखते हैं, जो अन्याय के सामने खड़े होने का साहस रखते हैं।"