मुख्यमंत्री ने कहा कि 33 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों के साथ राजस्थान देश का चौथा सबसे बड़ा एमएसएमई राज्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार रोजगार सृजन, उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट से प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को नई दिशा मिली है।
उन्होंने बताया कि उद्योगों के लिए डायरेक्ट अलॉटमेंट पॉलिसी-2025 लागू होने के बाद पिछले एक वर्ष में 1,600 से अधिक औद्योगिक भूखंड आवंटित किए गए हैं। उद्योग स्थापना से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। लैंड यूज स्वीकृति की समय-सीमा 60 दिन से घटाकर 30 दिन तथा उद्योग स्थापना की अनुमति जारी करने की अवधि 120 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई है। वहीं, गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की व्हाइट कैटेगरी सूची का विस्तार 104 से बढ़ाकर 877 उद्योगों तक किया गया है।
मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं
* हस्तशिल्पियों, बुनकरों एवं सूक्ष्म उद्यमों के उत्पादों की बिक्री के लिए पीपीपी मॉडल पर हाट विकसित किए जाएंगे। पहले चरण में पुष्कर, नाथद्वारा, जैसलमेर और अलवर में इनका निर्माण होगा।
* पंच गौरव योजना के अंतर्गत चिन्हित प्रजातियों एवं वनस्पति आधारित प्रसंस्करण इकाइयों को 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' योजना में वित्तीय सहायता दी जाएगी।
* रिप्स-2024 में एमएसएमई के लिए कैपिटल सब्सिडी की अवधि 10 वर्ष से घटाकर 7 वर्ष की गई।
* इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए रिप्स-2024 के तहत न्यूनतम निवेश सीमा घटाकर 15 करोड़ रुपये की गई।
* भारत सरकार की ईसीएमएस योजना से जुड़ी परियोजनाओं को अब अधिकतम पांच चरणों में निवेश की अनुमति मिलेगी।
* इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिला एवं दिव्यांग कार्मिकों का मासिक प्रशिक्षण भत्ता 4,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये किया गया।
* राजस्थान वेंचर कैपिटल फंड के माध्यम से इस वर्ष 25 नए स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं को देखते हुए प्रदेश में सोलर पैनल मैन्यूफैक्चरिंग पार्क, सिरेमिक पार्क, डाटा सेंटर पार्क तथा डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग पार्क विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही, विकसित ग्राम-वार्ड अभियान के माध्यम से प्रत्येक जिले के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राजस्थान औद्योगिक विकास नीति, 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) कॉफी टेबल बुक का विमोचन तथा रैम्प (राइजिंग एंड एक्सीलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस) पोर्टल का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री के.के. विश्नोई, सांसद मंजू शर्मा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे।