बैठक में बाल स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों NTEP, NHM, RBSK और WCD के कुल 32 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा में बच्चों में टीबी की पहचान बढ़ाने, रेफरल व्यवस्था को बेहतर करने, हितधारकों की भागीदारी मजबूत करने और टीबी के मामलों के नोटिफिकेशन में वृद्धि पर विशेष जोर दिया गया।
QR कोड आधारित रेफरल व्यवस्था पर जोर
जिला टीबी अधिकारी
डॉ. विकास बालियान ने समुदाय स्तर पर टीबी के संभावित मामलों के रूप में पहचाने जाने वाले बच्चों के लिए
QR कोड आधारित रेफरल व्यवस्था की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने इसे रेफरल प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक संभावित नवाचार बताया।
समय पर जांच और उपचार के लिए बेहतर फॉलो-अप जरूरी
WHP के डायरेक्टर-प्रोग्राम्स श्री अखिलेश शर्मा ने बच्चों में टीबी के मामलों की पहचान, दस्तावेजीकरण और विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के बीच समन्वय से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने समय पर निदान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए सुव्यवस्थित रेफरल और फॉलो-अप व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने टीबी उन्मूलन में
RBSK और RKSK की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया तथा समुदाय आधारित स्क्रीनिंग और रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जमीनी अनुभव और नए तरीकों को साझा किया।
बच्चों में टीबी के लक्षणों के प्रति जागरूकता जरूरी
सिविल अस्पताल, रोहतक की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहिता कपूर ने प्रतिभागियों को बच्चों में टीबी के प्रमुख लक्षणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बीमारी की समय पर पहचान के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने और व्यवस्थित स्क्रीनिंग के महत्व पर जोर दिया।
बैठक में जिला NTEP टीम से
PPM कोऑर्डिनेटर श्री जसविंदर नंडाल और
DPC श्री जयंत सांगवान सहित WHP टीम के
जिला प्रोजेक्ट मैनेजर विनोद राणा तथा जिला प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर भूपिंदर भी उपस्थित रहे।
बैठक में हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से टीबी की पहचान, रेफरल और उपचार से जुड़ी कमियों को चिन्हित करने तथा व्यावहारिक समाधान तलाशने पर चर्चा हुई। साथ ही, बच्चों में टीबी के बेहतर उपचार परिणामों के लिए NTEP और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श किया गया।