मुख्य अतिथि की उपस्थिति :
कार्यक्रम में डॉ. रमेश देहराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। गोष्ठी के आरंभ में आशा खत्री 'लता' ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बनाया। डॉ. मधुकांत ने उपस्थित समस्त साहित्यकारों का हार्दिक स्वागत किया।
223वीं पुस्तक 'शैक्षिक त्रासदी की कहानियाँ' का विमोचन :
इस शुभ अवसर पर डॉ. मधुकांत की 223वीं पुस्तक
'शैक्षिक त्रासदी की कहानियाँ' का विधिवत विमोचन किया गया। इस पुस्तक का संपादन डॉ. जय भगवान सिंगला ने किया है। पुस्तक में शिक्षा व्यवस्था की विडम्बनाओं और त्रासदियों को कहानियों के माध्यम से संजीदगी से उकेरा गया है।
सम्मान समारोह :
गोष्ठी में कई साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। प्रादेशिक लघुकविता संगठन, सिरसा की ओर से आशा खत्री 'लता' तथा बृजबाला को सम्मान प्रदान किया गया। प्रज्ञा साहित्यिक मंच, रोहतक की ओर से मुख्य अतिथि डॉ. रमेश देहराज एवं कार्यक्रम अध्यक्षा नीलम अग्रवाल को भी सम्मानित किया गया।
नशा मुक्ति अभियान पर साहित्यिक प्रस्तुतियाँ :
नशा मुक्ति अभियान विषय पर अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने अपनी भावपूर्ण रचनाएँ प्रस्तुत कीं। इनमें बृजबाला, पूनम भोला, स्नेह बंसल, प्रो. श्याम लाल कौशल, एन.सी. मलिक, आशा खत्री 'लता', आशा विजय 'विभोर', जय सिंह 'जीत', अंजू कपूर गांधी, एकता कोचर रल्हन, पवन मित्तल, डॉ. चंद्रदत्त शर्मा, डॉ. तरुणा सचदेवा, डॉ. अंजना गर्ग तथा संदीप शर्मा 'बावरा' सम्मिलित रहे। इन साहित्यकारों की रचनाओं ने कार्यक्रम को चार चाँद लगा दिए।
आभार एवं संकल्प :
मुख्य अतिथि डॉ. रमेश देहराज ने प्रज्ञा साहित्यिक मंच और उसके सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने उपस्थित सभी साहित्यकारों को 7 जून को
उजाला आज तक ट्रस्ट द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम में सादर आमंत्रित किया और रोहतक के साहित्यकारों को अपने
उजाला आज तक ट्रस्ट के माध्यम से राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का संकल्प लिया।
NGO संचालक विजय ने नशा मुक्ति अभियान में यथासंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। गोष्ठी की अध्यक्षा नीलम अग्रवाल ने समापन वक्तव्य में नशा मुक्ति अभियान का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की, सभी साहित्यकारों को उनकी उत्कृष्ट रचनाओं के लिए बधाई दी और ऐसे सामाजिक सरोकार वाले कार्यक्रमों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।