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Saturday, June 20, 2026

News Desk / News Delhi /May 31, 2026

सिरसा में सम्मानित साहित्यकार जयसिंह जीत की कृति को मिली साहित्य जगत में सराहना |
हिंदी साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे साहित्यकार एवं हिंदी प्रवक्ता जयसिंह जीत की चर्चित पुस्तक "अधूरी चिट्ठियाँ'" को पाठकों और साहित्यकारों से लगातार सराहना मिल रही है। हाल ही में इस कृति के लिए जयसिंह जीत को सिरसा में सम्मानित भी किया गया। पुस्तक की विस्तृत समीक्षा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मधुकांत ने की है, जिसमें उन्होंने इसे प्रेम, संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों की आदर्श पुस्तक बताया है।

हरियाणा / प्रेम, संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों का सशक्त दस्तावेज है 'अधूरी चिट्ठियाँ' : डॉ. मधुकांत

डॉ. मधुकांत के अनुसार, अधूरी चिट्ठियाँ' जयसिंह जीत द्वारा रचित एक अत्यंत भावपूर्ण एवं संवेदनशील लघुकविता संग्रह है, जो मानव मन की सूक्ष्म भावनाओं और रिश्तों की गहराइयों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करता है। विपिन पब्लिकेशन द्वारा वर्ष 2026 में प्रकाशित इस कृति में कुल **101 लघुकविताओं** का संकलन है, जिनका केंद्र आदर्श प्रेम, समर्पण, सामाजिक सरोकार और मानवीय संबंध हैं।

समीक्षा में कहा गया है कि कवि का दृष्टिकोण अत्यंत उदार, मर्यादित और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत है। उनकी रचनाओं में प्रेम को केवल भावनात्मक आकर्षण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उसे समुद्र से भी गहरा, आकाश से भी व्यापक और क्षितिज से भी दूर तक फैला हुआ शाश्वत भाव माना गया है। संग्रह में शामिल तुम', 'जीवन', 'मौन', 'प्राण' और 'गहराई' जैसी लघुकविताएँ प्रेम की पवित्रता और आदर्श स्वरूप को उजागर करती हैं, जबकि 'अधूरी चिट्ठियाँ', 'संभावना' और 'त्याग' जैसी रचनाएँ मन की पीड़ा, संवेदनाओं और भावनात्मक गहराई को सशक्त अभिव्यक्ति देती हैं।

जयसिंह जीत पेशे से हिंदी के प्रवक्ता हैं और इसका सकारात्मक प्रभाव उनकी भाषा एवं अभिव्यक्ति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनकी भाषा सरल, सहज, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है। हिंदी के साथ उर्दू शब्दों का संतुलित एवं सुंदर प्रयोग उनकी रचनाओं को और अधिक आकर्षक बनाता है। लघुकविता जैसी चुनौतीपूर्ण विधा में कम शब्दों में गहन भाव व्यक्त करने की कला में वे पूरी तरह सफल दिखाई देते हैं।

यह काव्य संग्रह केवल प्रेम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक चेतना और मानवीय सरोकारों का भी प्रभावी समावेश है। कवि ने महिला सशक्तिकरण, आदर्श जीवन, पर्यावरण संरक्षण, परमार्थ तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे समकालीन विषयों को अपनी रचनाओं में स्थान देकर साहित्य की सामाजिक भूमिका को सार्थक बनाया है।

डॉ. मधुकांत ने अपनी समीक्षा में पुस्तक के आकर्षक आवरण, उत्कृष्ट मुद्रण और साज-सज्जा की भी सराहना की है। उनका मानना है कि पुस्तक का प्रस्तुतीकरण पाठकों को पहली नजर में ही आकर्षित करता है। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर 'देव' सहित अनेक साहित्यिक हस्तियों द्वारा कृति की प्रशंसा इसकी साहित्यिक गुणवत्ता और प्रभावशीलता को प्रमाणित करती है।

डॉ. मधुकांत के अनुसार, 'अधूरी चिट्ठियाँ' एक ऐसी मूल्यवान साहित्यिक कृति है, जो युवाओं सहित हर आयु वर्ग के पाठकों के हृदय को स्पर्श करने की क्षमता रखती है। यह संग्रह हिंदी साहित्य में लघुकविता की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण और सराहनीय योगदान है।

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