उड्डयन प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा राजस्थान
राजस्थान अब उड्डयन प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। किशनगढ़ और हमीरगढ़ में निजी फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों की स्थापना से पायलट प्रशिक्षण और उड्डयन कौशल विकास की संभावनाएं व्यापक हुई हैं। बीते एक वर्ष में प्रदेश में कुल 8 फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूलों के संचालन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, जिससे युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के नए अवसर मिलेंगे।
फ्लाइंग स्कूलों के सुचारु संचालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर टैक्स की दर 26 प्रतिशत से घटाकर मात्र 2 प्रतिशत कर दी है।
इसके साथ ही राज्य के विभिन्न जिलों में मौजूद हवाई पट्टियों के अधिकतम उपयोग के लिए इन्हें फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूलों के संचालन हेतु उपयोग में लाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा नीति बनाई गई है, जिसके तहत हवाई पट्टियों से लगी भूमि पर हैंगर निर्माण के लिए दरें भी निर्धारित की जाएंगी।
नागरिक उड्डयन नीति से निवेश को बढ़ावा
राजस्थान नागरिक उड्डयन नीति के लागू होने से प्रदेश में नए हवाई अड्डों के विकास, यात्री और कार्गो कनेक्टिविटी के विस्तार तथा उड्डयन क्षेत्र में निवेश के नए द्वार खुले हैं। नीति के प्रथम चरण में बाड़मेर के उत्तरलाई और उदयपुर हवाई अड्डे के उन्नयन का कार्य किया जाएगा। इसके अलावा सवाई माधोपुर के चकचैनपुरा, नागौर, भीलवाड़ा के हमीरगढ़, सिरोही के आबूरोड़ तथा श्रीगंगानगर के लालगढ़ जाटान हवाई पट्टियों के विकास की योजना पर भी कार्य किया जाएगा।
राज्य सरकार ने एयरोस्पोर्ट्स गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए हवाई पट्टियों की भूमि को लीज पर देने की शर्तों को भी स्वीकृति दी है। इससे एडवेंचर स्पोर्ट्स, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
उड्डयन से जुड़े प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना
नागरिक उड्डयन के समग्र विकास के लिए उड़ान प्रशिक्षण संगठन, विमान अनुरक्षण इंजीनियरिंग प्रशिक्षण संगठन तथा रख-रखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (एमआरओ) संगठनों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में झालावाड़ में उड़ान प्रशिक्षण संगठन की स्थापना की जाएगी।
शहरों को मिलेगी बेहतर हवाई कनेक्टिविटी
प्रदेश के प्रमुख शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। जयपुर से उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर को छोटे विमानों के माध्यम से जोड़ने की योजना पर कार्य प्रगति पर है। इस आंतरिक कनेक्टिविटी से व्यापार, प्रशासनिक पहुंच, चिकित्सा सेवाओं और पर्यटन को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
जयपुर, उदयपुर और उत्तरलाई हवाई अड्डों का विस्तार
राजधानी जयपुर में उड्डयन सुविधाओं के विस्तार के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा 12,778 वर्गमीटर भूमि राज्य सरकार को आवंटित की गई है, जहां नया स्टेट हैंगर और वीआईपी परिसर विकसित किया जाएगा। वहीं उदयपुर हवाई अड्डे के विस्तार के लिए 145 एकड़ निजी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त उत्तरलाई हवाई अड्डे पर नागरिक एन्क्लेव और संपर्क मार्ग के लिए लगभग 63 एकड़ भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई जारी है।
उड्डयन के क्षेत्र में इन ठोस पहलों के साथ राजस्थान न केवल नई ऊंचाइयों की ओर उड़ान भर रहा है, बल्कि युवाओं के सपनों और प्रदेश के विकास को भी नई दिशा दे रहा है।