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Wednesday, February 4, 2026

पॉलिटिक्स

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को लगाई कड़ी फटकार, कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी मामले में शुक्रवार को होगी सुनवाई

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में जनजातीय कार्य मंत्री और आठ बार के विधायक विजय शाह एक बार फिर अपनी विवादित टिप्पणी के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने भारतीय सेना की सजायाफ्ता अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान दिया, जिसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देने के लिए शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां गुरुवार, 15 मई 2025 को सुनवाई के दौरान भारत के नव-नियुक्त मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए शुक्रवार, 16 मई 2025 की तारीख तय की है।

विजय शाह: कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री कौन हैं?

विजय शाह, मध्य प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख नाम, हाल ही में कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई अपनी टिप्पणी के कारण विवादों में घिर गए हैं। यह टिप्पणी इतनी गंभीर थी कि इसने कानूनी कार्रवाई और व्यापक आलोचना को जन्म दिया। मोहन यादव सरकार में जनजातीय कार्य मंत्री के रूप में कार्यरत शाह का राजनीतिक करियर दशकों तक फैला है, जिसमें चुनावी सफलताएँ, विवाद और जनजातीय क्षेत्रों में मजबूत प्रभाव शामिल हैं। यह लेख विजय शाह की पृष्ठभूमि, सोफिया कुरैशी विवाद, उनके राजनीतिक सफर और उनकी विवादास्पद छवि को गहराई से विश्लेषित करता है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए बीजेपी मंत्री विजय शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बुधवार को राज्य के आदिवासी मामलों के मंत्री और भाजपा नेता विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने का आदेश दिया। यह आदेश कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला द्वारा दिया गया।

बीजेपी नेता और आदिवासी कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह के कथित बयान पर विवाद, कर्नल सोफिया कुरैशी को "आतंकी की बहन" बताने पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने की बर्खास्तगी की मांग

भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की प्रेस ब्रीफिंग में देश का नेतृत्व किया, को "आतंकवादियों की बहन" बताने वाले कथित बयान ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। यह बयान मध्य प्रदेश के आदिवासी कल्याण मंत्री और बीजेपी नेता कुंवर विजय शाह द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बयान को "अपमानजनक, शर्मनाक और ओछा" करार देते हुए शाह की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है। हालांकि, कुंवर विजय शाह ने दावा किया कि उनके बयान को गलत संदर्भ में लिया गया है।

कांग्रेस कार्यसमिति का प्रस्ताव: जाति जनगणना में देरी नहीं, पारदर्शिता और समयसीमा जरूरी

कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) ने 2 मई 2025 को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से जाति जनगणना को शीघ्र और पारदर्शी ढंग से लागू करने की मांग की। प्रस्ताव में कहा गया कि 11 साल के "जिद्दी इनकार" के बाद मोदी सरकार ने जाति जनगणना की मांग स्वीकार की है, लेकिन इसे लागू करने में देरी नहीं होनी चाहिए।

तेलंगाना जाति सर्वे: सामाजिक न्याय की राह में सबक और चुनौतियाँ

तेलंगाना में हाल ही में संपन्न जाति सर्वेक्षण ने सामाजिक न्याय और नीति निर्माण की दिशा में एक नया अध्याय खोला है, लेकिन इसके साथ ही कई विवाद और चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। यह सर्वेक्षण, जो कांग्रेस शासित तेलंगाना में पहला व्यापक जाति सर्वे था, न केवल राज्य के लिए बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल बन सकता है। हालाँकि, इसके निष्कर्षों और प्रक्रिया पर विपक्षी दलों की आलोचनाओं ने कई सवाल खड़े किए हैं। केंद्र सरकार के हालिया निर्णय, जिसमें आगामी राष्ट्रीय जनगणना में जाति आधारित आंकड़े शामिल करने की घोषणा की गई है, के आलोक में तेलंगाना सर्वेक्षण के सबक और चुनौतियाँ और भी प्रासंगिक हो गए हैं।

जाति जनगणना पर विपक्ष की जीत का दावा, सरकार के फैसले को बताया राजनीतिक और सामाजिक दबाव का नतीजा

केंद्र सरकार द्वारा देशव्यापी जातिगत जनगणना कराने की घोषणा के बाद राष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे “लंबे संघर्ष की जीत” बताते हुए सरकार से जनगणना की समयसीमा तय करने की मांग की है, जबकि सरकार के सहयोगियों ने इसे ऐतिहासिक कदम करार दिया है।

बिहार चुनाव से पहले केंद्र सरकार का बड़ा कदम: दशकीय जनगणना में शामिल होगी जाति आधारित गणना, लेकिन समयसीमा तय नहीं

बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीने पहले केंद्र सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि आगामी दशकीय जनगणना में जाति आधारित गणना भी शामिल की जाएगी। यह फैसला राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने इसी मांग को समाज को विभाजित करने वाला कदम बताकर ठुकरा दिया था।

कॉमनवेल्थ घोटाले में ईडी की क्लोज़र रिपोर्ट पर सियासी घमासान: कांग्रेस ने मोदी और केजरीवाल से माफ़ी की मांग की

दिल्ली की एक अदालत ने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की क्लोज़र रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से माफ़ी की मांग की है, आरोप लगाते हुए कि इन नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को झूठे आरोपों के आधार पर बदनाम किया।

पहलगाम आतंकी हमला: सर्वदलीय बैठक में केंद्र सरकार ने मानी सुरक्षा चूक, विपक्ष ने प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति और नफरत फैलाने वाले अभियानों पर उठाए सवाल

20 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की जान चली गई। इस घटना ने घाटी में हाल ही में लौटते सामान्य हालात और पर्यटन गतिविधियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। घटना के बाद 24 अप्रैल को केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें प्रमुख विपक्षी दलों सहित कई दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

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