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Saturday, June 20, 2026

अन्तर्राष्ट्रीय

ताइवान ने शेयर बाज़ार मूल्य में भारत को कैसे पीछे छोड़ा | एआई, चिप उद्योग और वैश्विक अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर - संजय सक्सैना

हाल के दिनों में वैश्विक वित्तीय जगत में एक ऐसी खबर ने निवेशकों, अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं का ध्यान खींचा है, जिसने एशिया की आर्थिक शक्ति संतुलन पर नई बहस शुरू कर दी है। ताइवान ने स्टॉक मार्केट वैल्युएशन यानी कुल शेयर बाज़ार मूल्य के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है। यह बदलाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह दुनिया में बदलती आर्थिक प्राथमिकताओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती ताकत और सेमीकंडक्टर उद्योग की अहमियत को भी दर्शाता है। आइए जानते हैं, संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, के इस लेख के माध्यम से।

शक्ति संतुलन या विनाश का रास्ता? मध्य-पूर्व का निर्णायक मोड़ - संजय सक्सैना

ईरान–इज़राइल–अमेरिका: कौन किसके साथ है, क्यों है, और असली संघर्ष किस बारे में है? आइए जानते हैं, संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, के इस एक विस्तृत, तटस्थ और गहन विश्लेषण के माध्यम से।

भारत ने विश्व मंच पर हर्बल औषधि विनियमन में दिखाई दमदार मौजूदगी

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) – अंतर्राष्ट्रीय हर्बल औषधि नियामक सहयोग (IRCH) की 16वीं वार्षिक बैठक में भारत ने एक बार फिर हर्बल औषधियों के वैश्विक नियमन में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका का प्रदर्शन किया।

क्या अमेरिका के एच-1B वीज़ा नियमों में बदलाव भारतीयों के लिए खतरे की घंटी हैं? और क्या इससे भारत की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा? - संजय सक्सैना

संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, के अनुसार अमेरिका के H-1B वीज़ा नियमों में हाल के बदलावों ने यह सवाल उठाया है कि क्या भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी के अवसर कम हो जाएंगे? साथ ही, क्या ये बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था और अमेरिकी कंपनियों पर भी असर डालेंगे? आइए, इस मुद्दे को संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, की मदद से आसान और समझने योग्य तरीके से समझते हैं।

श्रीलंका दौरे पर भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी 22 सितंबर से 25 सितंबर 2025 तक श्रीलंका की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह दौरा भारत और श्रीलंका के बीच रणनीतिक सहयोग और समुद्री साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति मुर्मु से की शिष्टाचार भेंट, भारत यात्रा का हुआ समापन

मॉरीशस गणराज्य के प्रधानमंत्री माननीय डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के साथ ही प्रधानमंत्री रामगुलाम की 8 दिवसीय भारत यात्रा का औपचारिक समापन हो गया।

चीन ने बनाया दुनिया का पहला 'बोन ग्लू' – हड्डियों को जोड़ने की नई क्रांति ! - संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक

क्या आप सोच सकते हैं कि टूटी हुई हड्डियाँ बिना सर्जरी के कुछ ही मिनटों में जुड़ जाएँ? *संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक* के अनुसार, यह अब सपना नहीं, हकीकत है! चीन ने दुनिया का पहला 'बोन ग्लू' विकसित किया है, जो 2-3 मिनट में टूटी हड्डियों को जोड़ सकता है। यह नई तकनीक हड्डी उपचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है और पारंपरिक सर्जरी व धातु इम्प्लांट की जरूरत को खत्म कर सकती है।

भारत की वैश्विक शक्ति बनने की दिशा: चीन और अमेरिका के संदर्भ में - संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक

चीन और अमेरिका के बीच विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में चल रही प्रतिस्पर्धा पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही है। संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक के अनुसार, इन दोनों देशों ने पिछले कुछ दशकों में अनुसंधान और विकास (R&D) में भारी निवेश किया है, जिससे वे वैश्विक तकनीकी और वैज्ञानिक शक्ति बन गए हैं। भारत को भी अब इस दौड़ में शामिल होने और वैश्विक शक्ति बनने के लिए अपनी रणनीतियों को मजबूत करना होगा। इस लेख में हम चीन, अमेरिका और भारत के अनुसंधान और विकास के क्षेत्रों की तुलना करेंगे, साथ ही यह देखेंगे कि भारत ने अब तक किन गलतियों को किया और उसे किन सुधारों की जरूरत है।

भारतीय नौसेना का जहाज 'निस्तार' सिंगापुर पहुंचा, भाग लेगा पैसिफिक रीच 2025 अभ्यास में

भारतीय नौसेना का नवीनतम स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल, आईएनएस निस्तार, आज सिंगापुर के चांगी नौसैनिक अड्डे पर पहुंच गया है। यह जहाज पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग के अधीन कार्यरत है और 15 सितंबर से शुरू हो रहे बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास ‘पैसिफिक रीच 2025’ में भाग लेगा।

यूएस हायर बिल: भारतीय आईटी कंपनियों के लिए चुनौतियां और अवसर - संजय सक्सेना

अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन (सीनेट) में हाल ही में एक महत्वपूर्ण बिल पेश किया गया है, जिसे HIRE (Halting International Relocation of Employment) बिल के नाम से जाना जा रहा है। संजय सक्सेना के अनुसार, इस बिल के तहत अगर कोई अमेरिकी कंपनी विदेशी कंपनी को ऐसी सेवाओं के लिए भुगतान करती है, जो अमेरिका में उपयोग होती हैं, तो उस पर 25% अतिरिक्त टैक्स लगेगा। यह बिल खास तौर पर भारत की आईटी कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि भारतीय कंपनियां अपनी आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से कमाती हैं। संजय सक्सेना बताते हैं कि यह बिल भारतीय आईटी उद्योग के लिए न केवल आर्थिक दबाव ला सकता है, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है। इस लेख में संजय सक्सेना इस बिल के प्रावधानों, भारतीय आईटी इंडस्ट्री पर इसके प्रभाव और संभावित अवसरों को विस्तार से समझा रहे हैं।

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