वैज्ञानिकों ने सोने के नैनोकणों के व्यवहार में एक ऐसा अनोखा बदलाव देखा है, जो भविष्य में बायोसेंसर, डायग्नोस्टिक उपकरणों और दवा वितरण प्रणालियों को और भी ज़्यादा प्रभावी और भरोसेमंद बना सकता है। यह शोध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान एसएन बोस राष्ट्रीय आधारभूत विज्ञान केंद्र में किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय आनुवंशिक अभियांत्रिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (ICGEB), नयी दिल्ली में आज भारत सरकार की दूरदर्शी बायोई3 नीति की पहली वर्षगांठ को भव्य रूप से मनाया गया। इस अवसर पर ‘बायोई3@1’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जैव प्रौद्योगिकी को अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार से जोड़ने के व्यापक दृष्टिकोण पर चर्चा की गई।
कोशिकाओं की दुनिया से एक चौंकाने वाली खोज सामने आई है – एक ऐसा ‘छुपा हुआ’ प्रोटीन, जो हमारी कोशिकाओं को यांत्रिक तनाव यानी Mechanical Stress से बचाता है, अब गंभीर रोगों के इलाज की नई राह खोल सकता है।
खेलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) में डोपिंग रोधी विश्लेषण के लिए तैयार की गई स्वदेशी रासायनिक संदर्भ सामग्री – मेथान्डिएनोन लॉन्ग-टर्म मेटाबोलाइट (LTM) – का औपचारिक शुभारंभ किया।
अनुसंधान राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन (ANRF) द्वारा आज प्रधानमंत्री प्रारंभिक कैरियर अनुसंधान अनुदान (PMECRG) पुरस्कार विजेताओं के साथ पहला 'मीट एंड ग्रीट' वेबिनार आयोजित किया गया। इस वर्चुअल कार्यक्रम में देशभर से 560 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
मोहाली से एक अहम वैज्ञानिक खोज सामने आई है, जो न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारी का जल्द पता अब संभव हो सकता है, वो भी सोने के बेहद बारीक कणों की मदद से
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2025 के भव्य समारोह में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि वर्ष 2040 में एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह से “विकसित भारत 2047” की उद्घोषणा करेगा। यह केवल भारत का सपना नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को प्रेरित करने वाला क्षण होगा।
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) और फ्रांस के IRAP (Institute de Recherche en Astrophysique et Planétologie) के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने तारों के वायुमंडल को समझने की दिशा में एक क्रांतिकारी खोज की है। उन्होंने तारकीय स्पेक्ट्रा (Stellar Spectrum) के अधिक यथार्थवादी अनुकरण (simulation) के लिए एफएनएलटीई (Full Non-Local Thermodynamic Equilibrium - FNLTE) आधारित एक नई गणनात्मक विधि विकसित की है, जो खगोल विज्ञान की दुनिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है।
क्या हम इस विशाल ब्रह्मांड में अकेले हैं? यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों और आम लोगों को सोचने पर मजबूर करता रहा है। हाल ही में, एक पूर्व अमेरिकी वायुसेना अधिकारी डेविड ग्रुश के दावों ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है। उनके खुलासे ने दुनियाभर में उड़न तश्तरियों (UFO) और परग्रही जीवन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। - संजय सक्सेना
वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है, जो अब तक इंजीनियरिंग की सबसे कठिन समझी जाने वाली धातुओं की मशीनिंग को भी आसान बना देगी। नई तकनीक खासकर जेट इंजन, परमाणु रिएक्टर और अंतरिक्ष यानों में इस्तेमाल होने वाली 'सुपर मिश्रधातुओं' (Super Alloys) की मशीनिंग में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।