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Wednesday, May 6, 2026

कला-साहित्य

डॉ. मधुकांत की कहानियों में समकालीन विमर्श: समाज, राजनीति और मानवीय संवेदनाओं का गहरा विश्लेषण

आधुनिक कथाकार डॉ. मधुकांत की रचनाएँ सामाजिक विसंगतियों, नैतिक पतन और बदलते मूल्यों पर करती हैं तीखा प्रहार । साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं होता, बल्कि वह उसकी विसंगतियों को उजागर करने वाला एक सशक्त माध्यम भी है। प्रख्यात साहित्यकार डॉ. मधुकांत की कहानियाँ इसी परंपरा को आगे बढ़ाती हैं। उनकी रचनाओं में आधुनिक समाज की जटिलताएँ, बदलते नैतिक मूल्य, राजनीतिक विडंबनाएँ और मानवीय संवेदनाओं का गहरा अंतर्द्वंद्व अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उभरकर सामने आता है।

सत्ता का 'मास्टरप्लान': नेता ख्यालीराम ने बताया कैसे हर सरकार में बना रहे परिवार का दबदबा

राजनीति में विचारधारा से ऊपर जब 'परिवारवाद' और 'स्वार्थ' हावी होता है, तो नैतिकता के मायने बदल जाते हैं। डॉ. मधुकांत की लघुकथा 'अपना राज' राजनीतिक परिवारों के उस पर्दे के पीछे के सच को उजागर करती है, जहाँ दुश्मन सिर्फ जनता के सामने बना जाता है।

आसमान छूते चांदी के भाव ने तोड़ा पिता का सपना: डॉ. मधुकांत की मार्मिक लघुकथा 'चांदी'

बढ़ती महंगाई केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह एक आम आदमी के उन सपनों को भी निगल जाती है जो वह बरसों से संजोता है। साहित्यकार डॉ. मधुकांत की लघुकथा 'चांदी' इसी कड़वी सच्चाई को बयां करती है।

“माँ – रूह से रूह तक” : मातृत्व की आत्मिक गहराई को उजागर करती अर्चना कोचर की भावपूर्ण रचना

मनुष्य के जीवन में यदि किसी का स्थान सर्वोपरि है, तो वह ‘माँ’ है। लेखिका अर्चना कोचर की रचना “माँ – रूह से रूह तक” मातृत्व के इसी अनंत, आत्मिक और गहरे स्वरूप को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।

23 भजनों में समाई सत्यनारायण कथा—पढ़ें डॉ. अशोक जाखड़ की अनोखी भजनावली "श्री सत्यनारायण भगवान कथा दर्शन"

मानव जीवन को आध्यात्मिकता से जोड़ने वाली भक्ति परंपरा को नई अभिव्यक्ति देने वाली पुस्तक "‘श्री सत्यनारायण भगवान कथा दर्शन’" इन दिनों साहित्य और धार्मिक जगत में विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। भक्तकवि डॉ. अशोक कुमार जाखड़ द्वारा लिखित इस भजनावली में भगवान श्री सत्यनारायण की कथा, भक्ति और दर्शन को सरल और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया गया है।

साहित्यकार डॉ. मधुकांत का ‘जल गीत’ बना जल संरक्षण का संदेशवाहक

पानी की बढ़ती कमी और पर्यावरण संकट के दौर में रोहतक के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मधुकांत की कविता "जल गीत" समाज को जल के महत्व का सशक्त संदेश देती नजर आती है। लोकधुन की लय और सहज शब्दों में रची यह कविता केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति जागरूकता का प्रभावी आह्वान भी है।

तेरी दासी: समर्पण और नारी शक्ति का अद्भुत चित्रण

डॉ. नवलपाल प्रभाकर दिनकर की कविता “तेरी दासी” प्रेम, समर्पण और नारी की आंतरिक शक्ति का अनूठा संगम है। यह कविता न केवल भावनात्मक रूप से गहराई लिए हुए है, बल्कि पाठक को सोचने और महसूस करने पर मजबूर करती है।

कला-साहित्य / September 23, 2025
साहित्यिक शिक्षक: राष्ट्रनिर्माण के असली शिल्पी - डॉ. चंद्रदत्त शर्मा चंद्रकवि

शिक्षक कभी साधारण नहीं होता। प्रलय और निर्माण दोनों ही उसकी गोद में पलते हैं। आचार्य चाणक्य के यह शब्द आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने तक्षशिला के समय थे। इतिहास गवाह है कि किस तरह आचार्य चाणक्य ने अपनी शिक्षा और ज्ञान से पूरे भारत की दिशा बदल दी थी।

कला-साहित्य / September 23, 2025
डॉ. नवलपाल प्रभाकर दिनकर की कविता 'पृथ्वी': प्रकृति के प्रति प्रेम और कृतज्ञता की भावना

डॉ. नवलपाल प्रभाकर दिनकर की कविता 'पृथ्वी' प्रकृति के प्रति गहरे प्रेम और कृतज्ञता को व्यक्त करती है। यह कविता पृथ्वी को एक माँ के रूप में चित्रित करती है, जो अपनी संतानों को सूरज की तपती किरणों से बचाती है और उन्हें प्रेम, शीतलता और सौंदर्य प्रदान करती है। सरल और भावपूर्ण शब्दों में लिखी गई यह कविता पाठकों को प्रकृति के महत्व को समझाने के साथ-साथ इसके संरक्षण का संदेश भी देती है।

कला-साहित्य / September 19, 2025
डॉ. नवलपाल प्रभाकर दिनकर की कविता "मोम के पंख" ने जीता पाठकों का दिल

कवि और लेखक डॉ. नवलपाल प्रभाकर दिनकर की कविता "मोम के पंख", जिसने साहित्य प्रेमियों के बीच खासी चर्चा बटोरी है। यह कविता मानव जीवन की महत्वाकांक्षाओं, आंतरिक संघर्षों और चुनौतियों को गहरे और भावनात्मक अंदाज में प्रस्तुत करती है।

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