सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा और चिंता :
गडकरी ने बताया कि भारत में सड़क हादसे एक गंभीर समस्या बने हुए हैं। हर साल होने वाली 4.80 लाख दुर्घटनाओं में 1.88 लाख लोगों की मौत होती है, जो देश के लिए बड़ा नुकसान है। उन्होंने कहा, "ये मरने वाले ज्यादातर युवा हैं, जो देश का भविष्य हैं। इन हादसों से न केवल परिवार तबाह होते हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी झटका लगता है।" गडकरी ने यह भी बताया कि इन हादसों में करीब 3 लाख लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं, जिससे उनकी जिंदगी पर लंबा असर पड़ता है।
2030 तक 50% कमी का लक्ष्य:
सड़क हादसों को कम करने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया है। गडकरी ने कहा, "हमारा लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं को 50 प्रतिशत तक कम करना है। इसके लिए सड़कों का विस्तार, बेहतर इंजीनियरिंग, और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।" उन्होंने बताया कि हाईवे को फोर-लेन और छह-लेन में अपग्रेड करने की योजना भी इसी लक्ष्य का हिस्सा है। इसके अलावा, ब्लैक स्पॉट्स (हादसों के लिए खतरनाक जगहों) को चिह्नित कर उनकी मरम्मत और डिजाइन में सुधार किया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर और पहाड़ी क्षेत्रों पर फोकस:
गडकरी ने यह भी जानकारी दी कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी इलाकों में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने को प्राथमिकता दी है। जम्मू-कश्मीर में दो लाख करोड़ रुपये की लागत से सड़क परियोजनाएं चल रही हैं। इसमें 105 सुरंगों का निर्माण शामिल है, जिनमें से कई पर काम तेजी से चल रहा है। खास तौर पर जोजिला सुरंग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "यह एशिया की सबसे लंबी सुरंग होगी। इसकी लागत पहले 12,000 करोड़ रुपये अनुमानित थी, लेकिन अब इसे 5,500 करोड़ रुपये में पूरा किया जा रहा है।"
उन्होंने आगे बताया कि जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर 36 सुरंगों का निर्माण हो रहा है, जिनमें से 22 पूरी हो चुकी हैं। इससे यात्रा का समय 7 घंटे से घटकर 3 से 3.5 घंटे रह जाएगा। पूर्वोत्तर राज्यों में भी सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए हैं, जिससे इन क्षेत्रों का आर्थिक विकास तेज होगा।
सड़क सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम:
गडकरी ने सड़क सुरक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हाईवे के विस्तार के साथ-साथ ड्राइवरों की ट्रेनिंग, वाहनों की गुणवत्ता जांच, और सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं। इसके अलावा, तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है, जैसे कि हादसों की निगरानी के लिए ड्रोन और सड़कों पर CCTV कैमरे लगाना। गडकरी ने यह भी कहा कि जनता में जागरूकता फैलाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जा रहे हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया:
विपक्षी दलों ने गडकरी के इस बयान का स्वागत किया, लेकिन सरकार से ठोस परिणाम मांगे। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, "सड़क हादसे कम करने का लक्ष्य अच्छा है, लेकिन पिछले 10 साल में हादसों की संख्या कम क्यों नहीं हुई? सरकार को आंकड़ों के साथ जवाब देना चाहिए।" वहीं, गडकरी ने जवाब में कहा कि पिछले कुछ सालों में सड़क सुरक्षा में सुधार हुआ है, लेकिन अभी और काम करने की जरूरत है।
जनता और विशेषज्ञों की राय:
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जताई। एक यूजर ने लिखा, "गडकरी जी का विजन शानदार है, लेकिन सड़क हादसे रोकने के लिए नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।" विशेषज्ञों का कहना है कि हाईवे का विस्तार और बेहतर डिजाइन सड़क हादसों को कम करने में मददगार होंगे, लेकिन ड्राइविंग की आदतों में बदलाव भी जरूरी है।
गडकरी के इस ऐलान से साफ है कि सरकार सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को लेकर गंभीर है। आने वाले सालों में हाईवे प्रोजेक्ट्स और सुरक्षा उपायों पर तेजी से काम होगा। 2030 तक सड़क हादसों को आधा करने का लक्ष्य हासिल करना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सरकार का दावा है कि वह इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।