नितिन गडकरी ने बताया कि इस योजना के तहत मौजूदा दो-लेन हाईवे को फोर-लेन में अपग्रेड करने का काम दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, 16,000 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्गों को छह-लेन में बदलने की भी योजना है, जिस पर करीब 6 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस परियोजना का मकसद सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और देश के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाना है। गडकरी ने कहा, "हमारा लक्ष्य 2030 तक सड़क हादसों को 50 प्रतिशत तक कम करना है। इसके लिए हाईवे का विस्तार और बेहतर इंजीनियरिंग जरूरी है।"
उन्होंने यह भी बताया कि भारत में हर साल करीब 4.80 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 1.88 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं। इनमें ज्यादातर 18 से 45 साल के युवा होते हैं। इस योजना से न केवल सड़क सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर और पहाड़ी क्षेत्रों पर फोकस:
गडकरी ने यह भी जानकारी दी कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों में हाईवे विकास को प्राथमिकता दी है। जम्मू-कश्मीर में दो लाख करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण कार्य चल रहा है, जिसमें 105 सुरंगें बनाई जा रही हैं। इसमें जोजिला सुरंग भी शामिल है, जो एशिया की सबसे लंबी सुरंग होगी। इसकी लागत का शुरुआती अनुमान 12,000 करोड़ रुपये था, लेकिन इसे 5,500 करोड़ रुपये में पूरा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर 36 सुरंगों का निर्माण चल रहा है, जिनमें से 22 पूरी हो चुकी हैं। इससे यात्रा का समय 7 घंटे से घटकर 3 से 3.5 घंटे रह जाएगा।" इसके अलावा, दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे का काम भी तेजी से चल रहा है, जो धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच को आसान बनाएगा।
सड़क सुरक्षा और आर्थिक लाभ:
गडकरी ने जोर देकर कहा कि फोर-लेन और छह-लेन हाईवे बनाने से सड़क हादसों में कमी आएगी, जो देश के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इसके साथ ही, बेहतर सड़क नेटवर्क से माल ढुलाई और यात्रा में लगने वाला समय कम होगा, जिससे व्यापार और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, "यह परियोजना देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगी और रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी।"
अब तक की प्रगति और भविष्य की योजना:
सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 सालों में भारत का हाईवे नेटवर्क तेजी से बढ़ा है। गडकरी ने कहा कि सरकार ने 2014 से अब तक 55,000 किलोमीटर से ज्यादा नए हाईवे बनाए हैं। अब इस नई योजना के तहत अगले दो सालों में 25,000 किलोमीटर हाईवे को फोर-लेन और 16,000 किलोमीटर को छह-लेन में बदलने का लक्ष्य है। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया:
विपक्षी दलों ने इस योजना का स्वागत तो किया, लेकिन इसके क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, "योजना अच्छी है, लेकिन पिछले कई प्रोजेक्ट्स में देरी और लागत बढ़ने की समस्या रही है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह परियोजना समय पर पूरी हो।" वहीं, गडकरी ने जवाब में कहा कि सरकार पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ काम कर रही है।
जनता में उत्साह:
इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे 'विकास की नई सौगात' करार दिया। कई लोगों ने लिखा कि इससे न केवल बड़े शहरों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों को भी फायदा होगा। एक यूजर ने ट्वीट किया, "गडकरी जी सचमुच देश के विकास पुरुष हैं। सड़कों की सूरत बदलने से जिंदगी बदल जाएगी।"
इस परियोजना के लिए जल्द ही डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी। मंत्रालय का कहना है कि 2025 के अंत तक इस प्रोजेक्ट का पहला चरण शुरू हो सकता है। यह योजना न केवल सड़क नेटवर्क को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक बुनियादी ढांचे के नक्शे पर और ऊपर ले जाएगी।